Blogger Tips and TricksLatest Tips And TricksBlogger Tricks

Tuesday, October 21, 2014

जादूनगरी से आये है कोई जादूगर !!


दोस्तों कल शाम  हम अपने एक मित्र के साथ बैठे बतिया रहे थे ,  शहर में एक जादूगर आया हुआ है इन दिनों , शहर  के एक सिनेमा हाल में रोज 4  शो चलते हैं उनके जादू के , अचानक से मित्र बोला चलो जादू  देखने चलते हैं। उस जादूगर के  बड़े बड़े कारनामे सुनने में आये  है , चल न  जादू देखने चलते  हैं.! मै अपने मित्र से बोला भाई पैसे देकर जादू देखने क्यों जाए जब फ्री में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक  मीडिया वाले  जादू दिखाने में लगे हुए हैं तो इनके जादू को ही देख लो।  मित्र बोला मैं  कुछ समझा नहीं ,  हम बोले हम ही कहा  समझ पा रहे हैं बिटवा , बस हम तो देखे जा रहे हैं जादू।  


चलो जब कह ही रहे हो तो थोड़ा विस्तार में बता देते हैं तुमको , मगर इसके लिए तुमको जादूनगरी चलना होगा 
हमारे साथ , मित्र बोला अब ये जादूनगरी कहा है ?  तभी मैं  अपने मित्र को शहर के एक ऐसे मोहल्ले में ले गया जहा पर कुछ लोग  हाथो में झाड़ू लेकर सड़क साफ़ कर रहे थे ,  तब मैं ने अपने मित्र से कहा ये है जादूनगरी ,  बोला अब  समझ गया किस जादू की बात कर  रहे हो तुम।  हम बात कर ही रहे थे  कि  बातो ही बातो में एक महानपुरुष  पर चर्चा होने लगी। वो महान हैं या नही ये तो नही पता , मगर वो जो वाणी बोलते हैं वो जरूर लोगो को मंत्रमुग्ध कर देती हैं, अरे अब का बताये  हम , बस कुछ यूँ समझ लीजिये की एक मरीज आदमी पर इतना असर किसी कड़वी दबाई का भी नही होता , जितना कि   बीमार और बिना बीमार लोगो पर इनके शब्दों का होता है ।   पिछले कुछ महीने से देश के कोने कोने में इनका जादू सा छाया हुआ है।  देश में ही नही ये   साहब तो दुनिया के सबसे ताकतवर देश में भी अपना जादू दिखाकर आ गए हैं।  

खैर जादू तो अब छा  गया इनका वो भी असरदार तरीके से लेकिन मजा तो तब आयेगा जब  लोग कहे सिर्फ बातो में नही इनके काम में भी जादू है।   काम भी ऐसा हो जो हर किसी के दिलो पर अपनी एक अनूठी छाप  छोड़ दे।   लोग उम्मीद लगाए हुए है , विपक्षी भी नजर गड़ाए हुये हैं ,अब तो कुछ तो विपक्षी लोग भी अब इनकी तारीफ़ करने में  लगे हैं , बेचारे एक ऐसे  ही विपक्षी हाल ही में हाईकमान द्वारा   नाप दिए गए , के जरूरत थी उनकी तारीफ़ में मीठे शब्द बोलने की , चुपचाप शान्ति से रहते , तो जमे रहते।  इनका एक ऐसा ही एक जादू अभी हाल ही में हर अखवार, हर टी वी. चैनल में दिखाई दिया , वो जादू ऐसा था की बड़े बड़े अरबपति घराने के लोग  हाथो  में झाड़ू लेकर सड़को पर आ गए।  किसी के जादू का इतना  गहरा असर मैं  ने पहली बार देखा  है। कभी कभी सोचता हूँ  " किस की झाड़ू , किसने चला दी". जिनकी झाड़ू थी वो तो बेचारे वो दिल्ली में झाड़ू चलाओ यात्रा निकालकर ही रह गए, और यहाँ  झाड़ू का आईडिया किसी और ने प्रयोग कर लिया।  लेकिन ख़ुशी हुयी देखकर सच में ये अभियान किसी जादू से कम  नही हैं , हम सबको मिलकर इस अभियान में हिस्सा लेना चाहिए।  





 हाल ही में एक वाकया तो बिजनौर जिले में ऐसा देखने को मिला की पहले तो दो अलग अलग राजनितिक दल के लोग सड़क पर झाड़ू से जादू दिखा रहे थे , थोड़ी ही देर बाद कुछ कहासुनी हुयी तो उस झाड़ू से एक दुसरे को पीटकर जादू दिखाने लगे।  

दुर्भाग्य  की बात तो ये है कि , ताली बजाने सब आते है, फोटो  लेने वाले भी  आते हैं, वीडिओ बनाने वाले भी आते हैं , लेकिन ये तमाशा बस कुछ पलो के लिए होता है और फिर कुछ  दिनो बाद इतिहास बन जाता है , सच बात तो ये है की हम बदलाव लाना  ही नही चाहते , आदत  हो गयी है हमको झेलने की , बस झेले जा रहे हैं , कल तक उनको झला था आज इनको झेलते हैं , हर कोई अपनी दबंगई दिखाकर दूसरो में मूह बंद करने में लगा हुआ है, दुसरो को प्रताड़ित करने में लगा है ,हर गली हर नुक्कड़ पर हर कोई अपने को समजसेवी बोलता है मगर कारनामे ऐसे की बेचारा "समाजसेवी " शब्द भी कहता होगा लोग मेरा कितना गलत प्रयोग करते हैं।  जिस दिन हम अपनी आदतो को बदलना शुरू करगे उस दिन हमको असली जादू दिखाई देगा और उस जादू के जादूगर होंगे खुद  हम।  
                           
नोट : अगर आपको पोस्ट पसंद आये तो मेरा अनुरोध है कृपया ब्लॉग फॉलो कर अपने सुझाव देकर मार्गदर्शन करें ! 

कंप्यूटर साइंस से सम्बंधित आर्टिकल पढ़ने के लिए क्लिक करे Computersciencejunction 

Thursday, October 16, 2014

हुदहुद तू क्यों आया ? - जानिये चक्रवातों से जुड़े कुछ रोचक रहस्य !




तुम अगर करोगे खिलवाड़ मुझसे तो मैं  एक दिन मौत बनकर आऊँगी  !
गरीब और अमीर की मुझे नही है पहचान , मैं हर आखँ में आसूं दे जाऊंगी  !
जन्नत में  भी तबाही और मौत के मंजर  हर तरफ नजर आयंगे तुमको    !
मैं रक्षक हूँ तुम्हारी , मुझे मत छेड़ो ,अगर छेड़ोगे तो भक्षक बन जाऊगी  !!


दोस्तों ऊपर लिखी पंक्तियाँ प्रकृति  हमसे कह रही है , प्रकृति ही हमे सब कुछ देती है , यही हमारी रक्षा करती है , किन्तु पिछले  दशको में मानव ने प्रकृति के साथ जो खिलवाड़ किया है , उसका अंजाम हमे तरह तरह की आपदाओ के रूप में देखने को मिला है , बस हम ये नही समझ पाये की ये आपदा हमारी अपनी रचाई हुयी हैं और प्रकृति  पर इल्ज़ाम लगा  देते हैं !

हज़ारो लोग बेघर ह जाते हैं , कुछ मर जाते हैं, तो कुछ दुःख भरी जिंदगी जीने के लिए बच जाते हैं, हज़ारो बच्चो अनाथ हो जाते हैं , जब प्रकृति अपना कहर  ढाती है. इसे न तो जगह की पहचान है और न ही अमीर गरीब की,  न ही ये किसी से प्यार करती है और न ही नफरत, इसे बस आता है तो अपना रूप बदलना , कभी अपने अच्छे रूप से हमारी मदद करती है तो कभी विकराल रूप लेकर तबाही मचाती है चाहे वो उत्तरांचल में बाढ़  से आई तबाही का दर्दनाक मंजर हो या भारत की जन्नत कहे जाने वाले कश्मीर की  बाढ़  का या फिर पच्छिम उत्तर प्रदेश  बिजनौर और मुरादाबाद  में होने वाली भारी वारिश जो हर साल बरसात  तबाही का खेल खेलकर किसानो की फसल बर्बाद करके के चली जाती है  , सड़के नष्ट कर जाती है। इसी तरह ,आसाम , अरुणाचल प्रदेश , बिहार, और नार्थ ईस्ट के राज्यों में बाढ़ का भयंकर नजारा देखने को मिलता है हर साल।



प्रकृति का दूसरो भयंकर रूप है चक्रवात , मुख्यत समुद्री तट वाले इलाको में अपना जलवा दिखता है , ऐसा ही एक चक्रवात अभी हाल ही में आया जिसका नाम था हुदहुद इसकी सरसराहट से ही इतना भयावय दृश्य उभरा है कि लोग अपनी रोजी-रोटी उजड़ने, खेत खलिहान बर्बाद से लेकर अपने आशियाने के तबाह होने को लेकर चिंतित हैं। लोगों के मन में लगातार यही सवाल 'चक्रवात' कर रहा है कि पहले तो नहीं आते थे ऐसे तूफान। कभी नीलम, तो कभी पायलिन, कभी हेलन तो कभी फैलिन  हुए चकवात हैं जो भयङकर तबाही मचाकर चले गए । हुदहुद  भी रविवार को तटीय क्षेत्रों में कहर बरपाकर गुजरा। इस तरह के तूफानों और चक्रवातों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। मौसम विज्ञानियों की मानें तो इसके लिए बदलता मौसम जिम्मेदार है। लेकिन ये मौसम इतने खतरनाक रूप से क्यों बदल रहा है। आखिर क्या वजह है इन बढ़ते तुफानो और चकर्वात की ? कौन है जिममेदार ?

इसकी एक वजह बढ़ता हुआ तापमान है।   वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रशांत महासागर में तापमान में हो रहे बदलाव की वजह से भी इस तरह के तूफानों में तेजी आ रही है। भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक एलएस राठौर के अनुसार प्रशांत महासागर में तापमान में काफी बदलाव देखा जा रहा है। ऐसा पहले नहीं था। अमूमन जब भी प्रशांत महासागर के तापमान में बदलाव दर्ज होता था तो उससे तेज हवाएं उत्पन्न होती रही हैं। अब ये बदलाव काफी जल्दी -जल्दी देखा जा हा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि तापमान में बदलाव के कारण प्रशांत महासागर में तेज़ हवाएं पैदा हो रहीं हैं जो तूफ़ान का रूप लेकर बंगाल की खाड़ी की तरफ बढ़ रहीं हैं। इसलिए दबाव और तेज़ हवाओं का सिलसिला बना हुआ है।
एक छोटे तूफान को चक्रवात बनने  में देर नही लगती।  कब ये चकर्वात का रूप धारण कर ले कुछ पता नहीं  चलता ,प्रशांत महासागर में पैदा हो रहे तापमान में बदलाव को मौसम वैज्ञानिकों नें 'ला नीना' का नाम दिया है। पायलिन सहित नारी और हईयान जैसे दूसरे तूफान भी प्रशांत महासागर के तापमान में उछाल की वजह से ही उत्पन्न हुए हैं। अंडमान में नम मौसम की वजह से इन तूफान में काफी तेज़ी पैदा हुई। वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में नम और गरम मौसम की वजह से तूफान चक्रवात का रूप धारण कर रहे हैं।
तुफानो के नाम प्रकरण की  प्रथा भी अजीब है।  अटलांटिक देशों के बीच समझौते से हुई तूफानों को नाम देने की शुरुआत। अगर इसके इतिहास में जाए तो हम पायगे कि  चक्रवातों का नाम रखने की शुरुआत अटलांटिक क्षेत्र में 1953 में एक संधि के जरिए हुई थी। हिन्द महासागर क्षेत्र के आठ देशों ने भारत की पहल पर 2004 से चक्रवाती तूफानों का नाम देना शुरू किया। इसके तहत सदस्य देशों द्वारा पहले से सुझाए गए नामों में से इन नामों को चुना जाता है। गौरतलब है कि कैटरीना, लीसा, लैरी, हिकाका, बुलबुल, फालीन, हुदहुद, जैसे अनोखे तूफानों के नाम हमेशा से लोगों के बीच उत्सुकता का विषय रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग के पूर्व महानिदेशक अजीत त्यागी ने कहा कि अटलांटिक क्षेत्र में हरिकेन और चक्रवात का नाम देने की परंपरा 1953 से ही जारी है। इसकी शुरुआत मियामी स्थित नैशनल हरिकेन सेंटर की पहल पर शुरू हुई थी। इसकी देखरेख जिनीवा स्थित विश्व मौसम संगठन करता है। उन्होंने कहा कि हिन्द महासगर क्षेत्र में यह व्यवस्था साल 2004 में शुरू हुई, जब भारत की पहल पर आठ तटीय देशों ने इस बारे में समझौता किया। इन देशों में भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, म्यांमार, मालदीव, श्रीलंका, ओमान और थाईलैंड शामिल हैं। त्यागी ने बताया कि इन आठों देशों की ओर से अपनी-अपनी पसंद के अनुसार नाम सुझाए गए हैं।
 इस बार ओमान की बारी थी और 'हुदहुद' नाम ओमान की ओर से सुझाए गए नामों की सूची में से आया है। इससे पहले आए 'फालीन' तूफान का नाम थाईलैंड की ओर से सुझाया गया था। उन्होंने कहा कि इसी तरह से अगले चक्रवात का नाम पाकिस्तान की ओर से दिए गए नामों में से रखा जायेगा। त्यागी ने कहा कि भारत की ओर से सुझाए गए नामों में 'मेघ, वायु, सागर, अग्नि' आदि शामिल हैं।

अगर अभी भी हमने ग्लोबल  बार्मिंग से  नुकसानों को नहीं समझा , और जंगलो का कटान बंद नही किया , हर जगह कारखाने और बस्तिया बनाकर यूं ही प्रकृति के साथ खिलवाड़ करते रहे तो हर साल एक नए हुदहुद जैसी  तबाही  का सामना करना पड़ेगा ! 
नोट : अगर आपको पोस्ट पसंद आये तो मेरा अनुरोध है कृपया ब्लॉग फॉलो कर अपने सुझाव देकर मार्गदर्शन करें ! 

कंप्यूटर साइंस से सम्बंधित आर्टिकल पढ़ने के लिए क्लिक करे Computersciencejunction 

Sunday, October 12, 2014

आ तुझे काट खाऊँ !

कुछ दिन पहले  जब अपने एक मित्र के साथ दिल्ली से आगरा  जा रहा था तो रास्ते में जोरो से भूख लग रही थी , जैसी ही हमारी बस एक ढाबे  पर रुकी तो हमने वह थोड़ी पेट पूजा की , मगर इस पेट पूजा ने मेरे अंदर के दर्द को इतनी बुरी तरह से करौंद दिया जिससे  इस लेख की उत्पत्ति हो  गयी. जब ढाबे में अंदर गए तो हमने वहा खाने में ४ आलू पराठे और दो हाफ दही का आर्डर दिया , आर्डर देते समय हमने रेट मालूम नही किया , पराठो की क्वालटी ऐसी थी की आपका देखकर ही मन भर  जाए खाना तो दूर की बात , खैर भूख जोर से लग रही थी हमने जैसे तैसे उनको खाया , खाने के बाद जब बिल दिया तो मेरे अंदर एक अजीब से दर्द की अनुभूति हो रही थी , बिल बना 280 रूपये का 50 रूपये प्रति पराठा  और 80 रूपये की 2 हाफ दही . बिल देकर ऐसा लगा जैसे मै  ने उस ढाबे वाले के पराठे नही खाए बल्कि उसने मुझे काट खाया हो . बिल देते समय जब मैने  उसकी शक्ल देखा तो मानो जैसे वो मुझसे कह रहा हो " आ तुजे काट खाऊँ ". कुछ देर बाद बस चली  और हम आगरा  पहुंचे , हम  बस से उतर कर सिटी में ऑटो से जा रहा थे, तभी मेरी नज़र शहर में लगे एक होर्डिंग पर पड़ी , जिस पर विज्ञापन के पोस्टर में लिखा था , आपके सपनो का घर 2 BHK  फ्लैट मात्र 35 लाख में , मुझे डर लगा मै ने उस होर्डिंग से अपनी नज़र हटा ली , वो भी यही कह  रहा हो "आ तुजे काट खाऊँ

कभी कभी सोचता हूँ की बचपन कितना अच्छा था काश अब से 20 साल पहले वाले समय में सारी जिंदगी गुजर जाती।   बचपन में जेब में 50 पैसे भी होते थे तो लगता था हम राजा हैं , अब इस महंगाई की दीमक ने सारी इच्छाओं का दमन कर दिया है , सपनो को देखना  ही छोड़  दिया  । मै कुछ जयदा समय पहले की नही 2004 की ही बात करता हूँ , उस समय चीनी 14 रूपये किलो , डीजल 20 रूपये  लीटर , सब्जियों के दाम भी 10 रूपये किलो से कम ही रहते थे , 2 रूपये की चाय , 5 रूपये के दो समोसे , 20 रूपये में अच्छी खाने  की थाली , 10 रूपये दर्जन केला . अजी अब किस किस चीज़ के दाम गिनाऊँ आपको मतलब ये कह लो की हर किस चीज़ के तब के दामो में और अब के दामो में इतना अंतर दिखाई देता  है कि अब हिम्मत नही होती कुछ भी खरीदने  की , और एक सुन्दर घर हो अपना  ये सपना तो बस सपना ही बनकर रह गया है  , जमीन के दामो ने आसमान को ऐसे छु रखा है की अब धरती पर आना ही नही चाहते , कहा से घर बनाये साहब , अब तो किसी भी  दूकान में कदम रखते ही डर लगता है हर दूकान वाले की शक्ल यही कहती है "आ तुजे काट खाऊँ "






इस महंगाई का बोझ अब ढोह नहीं पा रहा हूँ , चल ही नही पा रहा आगे इसके साथ बोझ काम करने के लिए बस सपनो का गाला घोटकर आगे चलने की कोशिश कर रहा हूँ.  अगर सही में देखा  जाए तो इन दस सालो में आदमी की महीने की तनख्वाह उस अनुपात में नही बढ़ी जिस अनुपात में ये महंगाई बाद गयी , हाँ जिनकी ऊपर की कमाई मोटी है उनकी बात मै नही कर रहा हूँ , और शायद ऐसे ही लोगो की वजहें से आज ये महंगाई बढ़ी है क्यों की जिनके पास पैसा है उनके लिए महंगाई कम है , कुछ लोग इस महंगाई में  खुश हैं क्यों की इसी से ही उनकी जेबे और घरो में  रखी तिजोरिया , उनके बैंक  खाते सब भरे पड़े है , वही कुछ गरीब हैं जो इतनी तकलीफ में हैं जी रो रो कर जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं, बच्चो की महँगी  पढ़ाई का खर्च  , अस्पताल  की फीस , डॉक्टर का इलाज़ कहा से कराएं ? इच्छाओ को पूरा करना तो दूर जरूरत की चीजो पर भी मन मारकर रह जाते हैं उनको ही नही पूरा कर पाते 

शायद इस देश के कुछ लोग इस देश का सब कुछ हड़प लेना चाहते है , ये जमीन ,ये हीरे जेवरात, ये  धन दौलत ये सब कुछ , लोग अमीर बनने की दौड़ में इतने मतलबी हो गये  हैं की दुसरे के लिए कुछ छोड़ना ही नही चाहते , उनके दुःख दर्द को समझना  ही नही चाहते ,  अगर खुद को दुःख होता है तो दुःख समझ में आता है अगर दूसरो को होता है तो हमे कोई फरक नही पड़ता ,  इस भूख  में इतने अंधे हो गए हैं की सब दूसरो को काटकर खाने में लगे हुए हैं । कब तक हम दूसरो को ये महसूस कराते रहेंगे की " आ तुझे काट खाऊँ ". अगर ऐसा ही चलता  रहा तो वो दिन दूर नही होगा जब  इस भूख में खुद ही कट  जायेंगे  आज भी उस गरीब आदमी की कही ये  पंक्ति मुझे याद आती है - "साहब मेरे बच्चे भी मेरी गरीबी की समझ रखते हैं, तभी तो घर के वर्तनो को अपना खिलौना बन लेते हैं " 

नोट : अगर आपको पोस्ट पसंद आये तो मेरा अनुरोध है कृपया ब्लॉग फॉलो कर अपने सुझाव देकर मार्गदर्शन करें !

Tuesday, October 7, 2014

एलियंस का उड़न खटोला !


अरे ओ छोटू !

हाँ चाचा !

अरे कछू सुनत रहो कि  नाय !

का चाचा  का भयो ?

अरे हम खबर पढ़त रहे कि ,  पुणे  के पास एक पायलट उड़नतश्तरी देखत रहे !

चाचा  शायद कोई  एलियन  उड़न  तश्तरी से खुले आसमान की सैर कर रहा होगा ! 

हाँ शायदा ऐसा ही होगा !

दोस्तों जब से एलियन शब्द लोगो के जहन  में आया है तब से उनकी मौजूदगी और अस्तित्व का पता लगाने के लिए तरह तरह के प्रयास किये जा रहे हैं , अब धरती के लोगो को ये अहसास सा होने लगा है कि किसी  दुसरे गृह पर भी लोग रहते है जिनको हम एलियन के नाम से जानने लगे हैं।  अभी हाल ही में कुछ  एलियंस अपने उड़न  खटोले से आसमान की सैर पर निकले हैं. हाल ही में मात्र 12   दिनों के भीतर इस तरह की दो  घटनाये सामने आई हैं ! 

पहली घटना है   सितम्बर 2014  की है जब  शाम  को इंग्लैंड के पार्ट्समॉउथ  शहर में  लोगो ने एक UFO 
( अनआइडेंटिफाइड फ्लाइंग  ऑब्जेक्ट ) देखा था जिसको  उडनतश्तरी के नाम से जाना जा रहा है ये खबर आम लोगो के लिए ही नहीं बल्कि वैज्ञानिको के लिए भी एक रहस्य और विस्मय की बात है  इस से पहले भी लोगो द्वारा दूनिया के कई हिस्सों में इस प्रकार की उडनतश्तरी देखे जाने की बाते सुनने   में आई हैं , कुछ लोग  इसको सही मानते हैं तो कुछ फिजूल की बात , फिलहाल तो वैज्ञानिक भी यही मान रहे हैं कि  ये कोई आसमान में घूमता हुआ बदल का टुकड़ा नही है बल्कि उडनतश्तरी जैसी ही चीज़ है , जिसका आकार डिस्क के जैसा है।  जिन लोगो ने इसको देखा उन्होने इसको एलियन का उड़ान खटोला कहा और इसकी तस्वीरें भी ली. 





            चित्र : इंग्लैंड के पार्ट्समॉउथ  शहर में शाम  के समय आसमान में देखी  गयी उड़नतश्तरी  !

इसी तरह की दूसरी घटना है 3 अक्टूबर 2014  की पुणे की है  , दैनिक भास्कर में छपी खबर के अनुसार की एक पायलट ने शुक्रवार दोपहर आसमान में एक UFO  देखा है इन पायलट ने ये दावा किया है कि लगभग 26,300 फुट की ऊंचाई पर वह ऑब्जेक्ट चमक रहा था। उस समय प्लेन 26,000 फुट की ऊंचाई पर 310 डिग्री के ऐंगल से उड़ रहा था। पायलट के अनुसार   हुयी चीज़ का   रंग हरा और सफेद था !  खबर में छपा था की  चेन्नई बेस्ड पायलट महिमा चौधरी एयरवेज की फ्लाइट 2491 को लेकर पुणे से अहमदाबाद के लिए रवाना हुई थीं। तभी उन्होने आसमान में ये UFO  देखा जिसको देखने के बाद पायलट ने मुंबई एयर ट्रैफिक कंट्रोल के सुपरवाइजरी ऑफिसर को इसके बारे में  बताया। उनके अनुसार इस यूएफओ को पुणे से 68 नॉटिकल माइल्स (लगभग 126 किलोमीटर) की ऊंचाई पर देखा गया। उसका रंग हरा और सफेद बताया गया है।


इंग्लैंड की इस  घटना की वीडियो को यहाँ पोस्ट में   अटैच किया जा रहा है जिसको यूॅ टुब से से लिया गया है आप इसको देखकर और जानकारी ले सकते हैं. 



फिलहाल जो भी हो मगर ये एलियन्स होते हैं या नही ?  ये उड़नखटोला एलियंस  का ही था या फिर कुछ और चीज़ थी ? , अगर कुछ और है तो क्या है ? लेकिन एक बात तो तय है कि  अब धीरे धीरे वैज्ञानिको को ये चिंता  सताने लगी है  , और वो एलियंस की खोज और उनसे जुड़े कई रहस्यों को ढूंढने में लग गए हैं. 

Reference: http://www.express.co.uk/news/weird/513866/Are-aliens-visiting-Portsmouth-UFO-spotted-over-south-coast

नोट : अगर आपको पोस्ट पसंद आये तो मेरा अनुरोध है कृपया ब्लॉग फॉलो कर अपने सुझाव देकर मार्गदर्शन करें !

Recent Posts