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Friday, December 25, 2015

क्या मनुष्य की यादो का प्रत्यारोपण संभव हो पायेगा ?

                   "Memory Transplantation"

अरे ओ छोटू !

हाँ चाचा !

कछु सुनत  रहो  की नाय ?

का चचा का भयो ?

अरे हम सुनत रहे कि आने वाले समय में एक मनुष्य के दिमागों  में बसी यादो  को दुसरे मनुष्य के दिमाग में डाला जा सकता है!

चचा अगर ऐसा हुआ तो किसी विषय विशेष में  तेज और अधिक जानकारी रखने वाले लोगो की यादो को उस विषय में कमजोर लोगो के दिमाग  में डालकर उनको भी तेज बनाया जा सकेगा। 

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हाँ शायद  ऐसा ही होगा !

क्या है याददाश्त शेयरिंग का यह  शोध ?


जी हाँ यदि  आने वाले समय में एक व्यक्ति की याददाश्त को दुसरे व्यक्ति के दिमाग में प्रत्यारोपित किया जा सकता है तो इसमें आश्चर्य मत करना। इस विषय पर दक्षिणी कलिफ़ोर्निया एवं पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के न्यूरो साइंटिस्ट की टीम  शोध कर रही है।  उन्होने यह शोध अभी चूहों  और बंदरो पर किया है।  साथ ही साथ भविष्य में  मानव पर भी इस शोध के सफल होने के संकेत दिए हैं।  यहाँ आपको बता दे कि  यह विशेष शोध अमेरिकी रक्षा  मंत्रायल के अनुरोध पर किया जा रहा है क्यों कि  क्यों उनका प्रयास है जो सैन्य कर्मचारी किसी वजह से चीज़ो को भूल जाते हैं उनको किसी तरह से वापस लाना।  


सबसे पहले आपको बता दे कि मनुष्य के  सिर के पिछले हिस्से में एक जगह होती है जिसका  वैज्ञानिक नाम हिप्पोकैंपस हैं। इस जगह के एक हिस्से को  सीए1 और दूसरे को सीए3 नाम से जाना जाता  है। मानव मष्तिष्क में सूचनाएं इससे होकर ही गुजरती हैं।  इनमें से ही कुछ सूचनाएं इस हिप्पोकैंपस में एकत्रित रहकर लंबे समय तक याद रह जाती हैं। यदि यह हिस्सा  क्षतिग्रस्त हो जाये तो  आदमी को चीजें कम याद रहती हैं।  धीरे धीरे वह चीजों को बिल्कुल भूल जाता है। 

यदि इस शोध के बारे में शुरुवाती अधयन्न की बात करे तो बता दे कि वैज्ञानिको ने अभी यह प्रयोग चूहों और बंदरों पर करने  के बाद चित्र दिखाकर मिर्गी के मरीजों के दिमाग के इस हिस्से की गतिविधियों पर भी किया है। बाद में कुछ विशेष प्रकार के इलेक्ट्रोड की मदद से  इन सूचनाओं को गुजारकर देखा और पाया की यदि उसे चूहों और बंदरों में प्रत्यारोपित किया जाए तो क्या सूचनाएं देर तक दर्ज रह जाती हैं ? इसमें उन्हें सफलता मिली है

इस शोध हेतु आगे की योजना !


यादाश्त के प्रत्यारोपण का यह प्रयोग अभी मनुष्यो पर नही  किया गया है। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए साउथ कैलिफोर्नया विश्वविद्यालय के न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. टेम बर्जर के अनुसार, इन प्रयोगों के जरिये उन्हें दिमाग के याददाश्त वाले हिस्से को बेहतर कर सकने के काम में भी सफलता मिली है। पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के एक शोधकर्ता का कहना है कि सिर में हिप्पोकैंपस के आसपास के इलाकों में याददाश्त को लेकर भी कुछ प्रयोग सफल रहे हैं और अगर इसी दिशा में काम बढ़ा तो दिमाग के ज्यादा बड़े हिस्से के उपयोग की जानकारी भी मिलेगी।


इस शोध के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. बर्जर को पूर्ण विश्वास है कि आगे के प्रयोगों में सफलता मिलने पर आने वाले दिनों में याददाश्त की शेयरिंग भी संभव होगी, मतलब एक की याददाश्त को दूसरे में प्रत्यारोपित भी किया जा सकेगा। ऐसा हो पाया, तब ही अमेरिकी रक्षा मंत्रालय सैन्य सेवा के क्षेत्र में अपने सपने को पूरा कर सकेगा। 

Saturday, December 19, 2015

" इन टिप्स को अपनाये और स्मार्ट फ़ोन हैंग होने से बचाये "

"Tips to prevent your smart phone from hanging"


आज कल जिस तरह से स्मार्ट फ़ोन का उपयोग दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है , उसको देखकर लगता है कि यदि हमारे पास स्मार्ट फ़ोन न हो तो हमारा दिन  कितना नीरस और बोरिंग हो जाएगा। जैसे कि  कभी कभी जब हमारा स्मार्ट फ़ोन अक्सर हैंग होने लगता है और सही से काम नही करता तो हमको बेहद बुरा बुरा सा महसूस होता है।  ऐसा लगता है जैसे स्मार्ट फ़ोन नहीं बल्कि हमारे शरीर के किसी हिस्से ने काम करना बंद कर दिया हो। 

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स्मार्ट फ़ोन के हैंग होने की समस्याए अक्सर हमारे सामने आती रहती हैं.स्मार्ट फ़ोन का हैंग होना हमारी गलतियों का भी नतीजा है।  आइये जानते हैं कुछ ऐसी बातो को जिनको ध्यान में रखते हुए हम अपने स्मार्ट फ़ोन को हैंग होने से बचा सकते हैं।  





  • सबसे पहले हमको अपने स्मार्ट फ़ोन की इंटरनल मेमोरी का उपयोग सावधानीपूर्वक करना होगा इसके लिए हम कुछ ऐसी फाइल और फोल्डर जिनका उपयोग हम  कम करते हैं या नही करते  उन्हें क्लाउड पर स्टोर कर सकते हैं। ताकि हमारे फ़ोन की इंटरनल  इंटरनल मेमोरी व्यर्थ न जाए।  क्लाउड पर स्टोर की बात करे तो  क्लाउड स्टोरेज का उपयोग  करने के लिए इंटरनेट कनेक्शन का होना आवश्यक  है। क्लाउड स्टोरेज एक आभाषी  ड्राइव की तरह होता है जहां उपयोगकर्ता  अपना अकाउंट बनाकर डाटा सेव कर सकते हैं। गूगल ड्राइव, वन ड्राइव और ड्रॉप बॉक्स क्लाउड स्टोरेज के ही एप्लिकेशन हैं। यहां से जरूरत पड़ने पर कभी भी संरक्षित किये गए  डाटा का बैकअप हम आसानी से ले सकते हैं ।
  • फोन के हैंग होने में  इंटरनल मेमोरी भी एक प्रमुख कारण  है। जब भी फोन की इंटरनल मेमोरी या जिसे हम रैम के रूप  में भी जानते हैं वह  कम हो जाती है तब अक्सर हमारा स्मार्ट  फोन हैंग होने लगता है।  इसलिए इंटरनल मेमोरी के सही उपयोग के लिए आप ऊपर बताये गए टिप्स के अलावा  अपने  स्मार्टफोन में उपलब्ध एक्सपैंडल मेमोरी विकल्प पर जाकर फाइलें, वीडियो, पिक्चर आदि को  स्टोर कर सकते हैं । 
  • जो एप्स जयदा उपयोग के नहीं हैं या आपके लिए आनेवाश्यक है  , आप उनको डाउनलोड न करे कभी कभी  ज्यादातर एप्स के डाउनलोड होने से भी फोन हैंग होने लगता है।
  • आपने अक्सर देखा होगा की अधिकतर  स्मार्टफोन में फैक्ट्री डाटा रिसेट नाम से एक विकल्प होता है । फैक्ट्री डाटा रिसेट करने से फोन हैंगिंग की समस्या काफी सीमा तक काम किया जा सकता है । लेकिन ऐसा करने से पहले आप अपने  फोन के डाटा का बैकअप लेना न भूले ।
  • स्मार्ट फोन की सेटिंग्स विकल्प में जाकर  स्टोरेज पर टच करे  ऐसा करने पर आपको  नीचे कैश डाटा (Cache data)  विकल्प दिखाई देगा , उसको  भी साफ  कर दें। आजकल गूगल प्ले स्टोर पर कुछ  ऐसे एप्स उपलब्ध है जिन्हें डाउनलोड कर और उसका सही  समय पर उपयोग करने  से आप इस समस्या से हमेशा के लिए भी निजात पा सकते है। 
  • इस टिप्स पर जरूर गौर फरमाये  कभी सांग वीडियो पिक्चर आदि अपने स्मार्ट फ़ोन की इंटरनल मेमोआर्य में ही  हैं हमको ऐसा नहीं करना है हमको अपने स्मार्ट   फोन में गाने, वीडियो, तस्वीरें और बाकी डाटा एक्सटर्नल मेमोरी ( मेमोरी कार्ड ) में ही संरक्षित करने चाहिए । 

Thursday, December 17, 2015

Now Purchase a Bottle of Fresh Mountain Air ( Cost $27.99 )


बढ़ते  हुए  वायु  प्रदुषण  ने आज मनुष्य  को इस मोड़ पर लाकर  खड़ा कर दिया है कि मनुष्य को जीने के लिए सांस  लेने  के  लिए  भी   अब स्वच्छ हवा  की बोतलों   को खरीदना पड  रहा है।  जी हाँ  हाल ही में चीन में जिस तरह से बढ़ते वायु प्रदुषण की समस्या पर अमल करते हुए  पिछले दिनों चीन की राजधानी बेजिंग में अलर्ट  जारी किया गया , उसको ध्यान में रखते हुए वहा  के लोगो ने अब सांस लेने के लिए पहाड़ो की स्वछ हवा से भरी बोतले को खरीदना शुरू कर दिया है। 

अब तक पानी के लिए कहा जाता था कि  पानी भी इंसान को बोतल में खरीदकर पीना पड़ता है , लेकिन अब तो नौबत यहाँ तक आ पहुंची है कि दूषित हवा से बचने के लिए सांस लेने के लिए भी स्वच्छ  हवा की  बोतलों का सहारा मानव को लेना पड़ रहा है।  बेजिंग में बढ़ते वायु प्रदुषण को ध्यान में रखते हुए चीन की सरकार ने पिछले दिनों वहा  शहर के सभी स्कूलों  को बंद  करने  एवं साथ ही साथ शहर में  इमारतों के निर्माण पर भी कुछ दिनों  रोक लगाने का फैसला लिया  है। 

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चीन में  बढ़ते वायु प्रदुषण   की  समस्या को देखते हुए कनाडा की एक कम्पनी ने  पहाड़ो की  स्वच्छ  हवा की  बोतलों को चीन में वायु प्रदुषण की समस्या को झेल रहे प्रमुख शहरो  में बेचना शुरू कर दिया है। कंपनी   ने एक  Vitality Air की बोतल की कीमत 27.99  डॉलर रखी  है।  चीन के शहर संघाई  में वहा के वायुमंडल में पिछले साल जनवरी से ही धुएं की  काफी बढ़ोतरी  हुयी है। ऐसे में वहा  लोगो ने इस बोतल को खरीदना शुरू कर दिया है।  जिसको बेजिंग एवं संघाई शहर के लोगो  ने चीन में ऑनलाइन शॉपिंग के लिए प्रयोग होने वाली  वेबसाइट Taobao पर ऑनलाइन मांगना शुरू कर दिया है। अब तक  वहा  ऐसी 500  बोतल बेचीं जा चुकी हैं और 700  बोतल का ऑनलाइन  आर्डर और भेजा जा चूका है।  

वर्तमान में चीन ही नहीं बल्कि विश्व के अधिकतर देश वायु प्रदुषण  कि समस्या से झूझ  रहे हैं।  जिसमे हमारे देश भारत का नाम भी टॉप लिस्ट में है।  दिल्ली में वायु प्रदुषण कि समस्या से निपटने के लिए जो कदम हाल ही में दिल्ली सरकार और सुप्रीम कोर्ट द्वारा  उठाये गए हैं ,उनके बारे में तो आप जान ही चुके हैं। ऐसे  में सवाल यह है की अगर वायु प्रदुषण इस कदर ही बढ़ता रहा तो क्या  भारत में भी लोगो को इस प्रकार की बोतल का सहारा लेना पड़ेगा  ?  अगर ऐसा हुआ तो यह धीरे धीरे पानी कि बोतलों कि तरह मानव जीवन यापन  में एक चलन बन जाएगा। 

Sunday, December 6, 2015

सावधान,वायुमंडल में घट रहा है ऑक्सीजन का स्तर !


आज सारा विश्व बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग की समस्या का सामना कर रहा है। हाल ही में पेरिस में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में भाग लेने वाले अधिकतर देशो के वरिष्ठ नेताओ ने इस हेतु ग्रीन हाउस गसो के ऊत्सर्जन को कम करने की दिशा में प्रयास करने हेतु कुछ विशेष समझोते किये।  डीजल पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों से निकलने वाले धुएं,कारखानो की चिमनी से  निकलने वाले  धुएं एवं जहरीली गैसो  ने  वातावरण की वायु को दूषित कर दिया है। हाल ही में इसका एक उदाहरण हमे चीन की राजधानी बेजिंग में देखने को मिला जब बेजिंग शहर  की वायु के अत्यधिक दूषित  होने पर वह कुछ दिनों के लिए अलर्ट घोषित कर दिया गया। 

हाल ही में हमारे देश की अरजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदुषण की समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने एक महत्वपूर्ण उठाया है जिसके तहत देश की  राजधनी  दिल्ली में 1  जनवरी 2016  से  एक दिन सम  और एक दिन विषम अंको वाली गाड़िया चलेगी। अब देखते हैं की यह नियम वायु के बढ़ते प्रदूषण को रोकने में कितना सहायक साबित होता है। 

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प्रकृति के के साथ बढ़ती मानव छेड़छाड़ ने आज ग्लोबल वार्मिंग की समस्या को अत्यधिक गंभीर बना दिया है। हाल ही में  चेन्नई में आई बाढ़  भी प्रकृति के साथ मानव की छेड़छाड़ का ही नतीजा है।  चेन्नई  में ईमारतों को बनाते समय , कालोनियों को बनाते समय इस बात की अनदेखी की गयी।वहा  पर मौजद तालाबों और झीलों को मिटा दीया गया , जिसका खामियाजा आज जनता को इस विकराल बाढ़  के रूप में देखने को मिला है।




हाल ही में वैज्ञानिकों ने अपने शोध के परिणामो  को ध्यान में रखते हुए सावधान  किया है कि समुद्री की गहराई में पानी  का तापमान बढ़ने के कारण पृथ्वी के ऑक्सीजन स्तर में लगातार गिरावट हो सकती है। जिसका असर आने वालो  सालों में इंसान और जानवर की मृत्यु दर में व्यापक तौर पर वृद्धि के रूप में हमको देखने को मिल सकता  है।


यदि हम शोध के अनुसार कुछ महासागरों की बात करे तो दुनिया के महासागरों के तापमान में 6 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि देखी गई है। जिसको ध्यान में रखते हुए  वैज्ञानिकों ने भविष्यवाणी की है कि साल 2100 तक ऑक्सीजन का उत्पादन रूक सकता है क्योंकि समुद्री तापमान बढ़ने से प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में रुकावट  आ सकती है। प्रकाश संश्लेषण द्वारा फाइटोप्लैंकटन (पादप प्लवक) कार्बन डाइऑक्साइड का उपभोग और ऑक्सीजन का उत्पादन (निस्तारण) करते हैं।

फाइटो प्लैंकटन को एक सूक्ष्म शैवाल (माइक्रो एल्गी) और सूक्ष्म जीव के तौर पर जाना जाता है। यह मीठे और खारे पानी के लगभग सभी स्रोतों में पाये जाते  हैं। इंग्लैड की लिसेस्टर यूनिवर्सिटी के मुख्य शोधविज्ञानी सर्गेई पेट्रोवस्की के अनुसार, यह समुद्री फाइटोप्लैंकटन पृथ्वी की लगभग दो-तिहाई ऑक्सीजन का निर्माण करने में अहम भूमिका अदा करते हैं। समुद्र के पानी के बढ़ते तापमान के कारन इनके खत्म होने का खतरा है। इनके खत्म होने के कारन  हमारे सामने वैश्विक स्तर पर वायुमंडलीय ऑक्सीजन की कमी का संकट ख़डा हो जाएगा।

इन शोधार्थियों के एक समूह ने समुद्र में ऑक्सीजन उत्पादन के लिए एक नया मॉडल विकसित किया है। यह मॉडल  प्लैंकटन समुदाय की ऑक्सीजन उपभोग और निस्तारण जैसी बुनियादी प्रक्रियाओं की गणना करने में सखम है । इस शोध के प्रमुख सर्गेई पेट्रोवस्की का कहना है कि , पिछले दो दशकों में ग्लोबल वार्मिग ने विज्ञान और राजनीति का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।  इससे होने वाले परिणामों के बारे में दुनिया को टी वे चैलनो के माध्यम से बहुत कुछ बताया जा चुका है। साथ ही साथ उन्होने यह भी कहा  कि अंटार्टिका में बर्फ के पिघलने से एक विनाशकारी वैश्विक बाढ़ आ सकती है।

इसलिए हमको आने वाली पीडियो के अस्तित्व के लिए ऑक्सीजन के बचाव हेतु अभी से ध्यान देना होगा और व्यक्ति स्तर पर , समहू स्तर पर , राज्यीय , राष्ट्रीय एवं अंराष्ट्रीय स्तर पर इस हेतु अपना सहयोग करना होगा। 





Thursday, December 3, 2015

माता पिता द्वारा बच्चियों की हत्या आखिर क्यों ?

जैसा कि विगत कुछ वर्षो  में देखने में आया है कि माता पिता द्वारा बच्चियों की हत्या करने में काफी बढोतरी  हुयी है।  लेकिन आखिर क्या कारण है कि हमारे देश में आये दिन ऐसे केश होते रहते है।  अगर इस समस्या को लेकर भारत में एक सर्वे कराया जाये तो इस सम्बन्ध में  विभिन्न लोगो के विभिन्न मत हो सकते है।  मगर मेरे विचार से केवल इतना कह देना कि मात पिता बेटे कि चाह के  लिए  या   केवल  आर्थिक विवशता के कारण ऐसा करते है पर्याप्त नहीं है।  क्यों कि हमारे देश में काफी समय पहले से ही बेटियों के पैदा होने पर परिवार में वो खुशी नहीं छाती है जो एक लड़का होने पर छाती है इसके लिए जो उतरदायी है वो है हम लोगो कि सोच और हमारे देश क़ा माहौल और अज्ञानता और गाँव में शिक्षा की  कमी  , खासकर गाँव में पहले से ही लडकियों को पपढाया  लिखाया नहीं ज़ाता था और उनकी कम ऊम्र में शादी कर दी जाती थी।   इतना ही नहीं जब शादी के बाद अगर लड़का नहीं होता तो उसमे भी ताने लड़की ( बहु ) को ही सुनने पड़ते थे। .इसमे कोई शक नहीं कि  आज भारत के हालत काफी हद तक बदल चुके है है आज कल लडकियों कि पढ़ाई  पर काफी ध्यान दिया जाता है और वह  केवल घरेलु कामो तक सिमित ना रहकर सरकारी और प्राइवेट नौकरी भी कर  रही है और हर क्षेत्र में सफलता के नये आयामों को छु रही है।  फिर भी  काफी जगह पर लडकियों को लेकर अभी भी वही स्थति बनी हुयी है जो काफी समय पहले थे उनकी सोच अभी भी वही है।  


                                       

आईये अब जरा नज़र डालते  है कुछ  अन्य और महत्वपूरण बिन्दुओ पर जिनके कारण कही ना कही हर माँ बाप लड़की होने पर डरता है या उनको जायदा चिंता  होने लगती है और इतनी ख़ुशी नहीं होती है जितनी कि लड़का होने पर होती है  जो इस प्रकार है --

1  देश में बढती  हुयी  बलात्कार कि घटनाएं  और लडकियों क़ा उत्पीडन . आये दिन ऐसे खबरे सुनने और पदने को मिल जाती है।  इसकी रोक थाम के लिए सरकार ने काफी नियम , क़ानून बनाये है जिनको कुछ हद तक फोलो भी किया ज़ाता है पर फिर भी ये घटनाएं रोकने क़ा नाम नहीं ले रही है।   

2 . आज के समय में दहेज क़ा काफी प्रचलन है। लड़की के पैदा होते ही माँ बाप को ये चिंता सताने लगती है कि उसकी शादी में दहेज क़ा इंतजाम कहा से होगा और   उसकी शादी एक अच्छे परिवार में हो उसको अच्छे  सास ससुर और पति मिले .कही ऐसा ना हो कि दहेज के लालच में आकर उसके सा ससुर और पति उनकी बेटी को परेशान  करे और अगर शादी के बाद उसके भी लड़की हुयी तो फिर तो और भी जायदा ताने सुनने पड़ेगे।  दहेज के करान या फिर सास ससुर के परेसान करने के कारण भी इस  देश की काफी बहूओ  खुदखुशी कि है या फिर उनको मार दिया गया है।  

3. कभी कभी लड़के लड़की द्वारा किया गया प्यार भी  समाज में माँ बाप कि बदनामगी क़ा कारण बन ज़ाता है।   अक्सर प्यार के कारण लड़के लडकियों को जान देनी पड़ जाती है या फिर उनको घर से निकाल दिया ज़ाता है या फिर ऐसी घटनाये सुनने में आती है कि लड़का लड़की एक दुसरे के साथ भाग जाते है।  
                                                           


 उपरोक्त बिन्दुओ  पर नज़र डाली जाये तो अधिकतर माँ बाप चाहेंगे कि उनके बेटी ना हो. मगर इसके लिए उतरदायी है हमारी सोच हमारे देश क़ा माहौल।   हमको अपने माहौल को , अपनी सोच को सुधारना  होगा. जो कि बहुत ही मुस्किल काम है भारत में . मगर इन सबका मतलब ये नहीं है कि अगर लड़की पैदा होती है तो उसकी हत्या कर दी जाये।  बल्कि माँ बाप को उसको भी ख़ुशी ख़ुशी अपनाना चाहिए और उसके लिए भी वो सब करना चाहिए जो लड़के  के लिए करते है और ऐसा हो भी रहा है।  अगर भविष्य में कभी कोई समस्या आती है तो समझदारी   के साथ  उसका  हल निकालना चाहिए ना कि उसके लिए लडकियों को दोषी ठहराया  जाये औरअंत में इतना और कहुगा कि लडकियों को भी अपनी समझदारी  क़ा परिचय देना चाहिए और अपने दायित्वों को सही से निभाना चाहिए ऐसा मै इसलिए कहा रहा हू क्यों कि  आगे चलकर  लड़की ही माँ और  सास बनती है।  अगर मै सच कहू तो इन अपराधिक घटनाओं को काफी हद तक  केवल लड़की ही रोक सकती है।

आज सुबह ही एक खबर सुनने को मिली कि विश्व में सबसे अधिक प्रयोग होने वाली सोशल मीडिया साइट फेसबुक के सी.ई.ओ मार्क जुकरबर्ग पिता बन गए हैं।  उनके  घर एक छोटी बच्ची ने जन्म लिया है और उन्होने इस ख़ुशी के मौके पर विश्व में समाज सेवा हेतु  फेसबुक में अपने 99 % शेयर (लगभग 3 लाख करोड़ रूपये) दान करने का फैसला लिया है। इन पैसो को मुख्यता विश्व में शिक्षा , स्वास्थ्य सेवाओ के लिए खर्च किया जाएगा। 

हर दम्पत्ति को बेटियो को ख़ुशी ख़ुशी अपनाना  चाहिए और उनको भी लड़को के सामान अधिकार देने चाहिए। 

" बेटी बचाओ , बेटी पढ़ाओ "  ताकि वह भी सम्मान सहित अपना जीवन जी सके। 

Monday, November 30, 2015

क्या वर्ष 2016 भी ऐसे ही जलायेगा धरती को ?

"ग्लोबल वार्मिंग " शब्द से हम सभी अच्छी तरह से परिचित हैं। ग्लोबल वार्मिंग के कारण और इससे होने वाले नुकसानों के बारे में भी हम सब जानते ही  हैं।  लेकिन फिर भी हम इसके प्रति सचेत  नहीं हैं।  जिस तरह से लगातार  धरती का वातावरण बदलता जा रहा है, उसको देखकर कही एक दिन हम ऐसे मोड़ पर ना आ जाए कि जिस प्रकार से आज हमको स्वछ  पानी पिने के लिए पैसे खर्च करने पड़ते हैं उसी तरह कही  सांस लेने के लिए भी हमको ऑक्सीजन को भी खरीदना पड़े। 
   

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की  मौसम एजेंसी के प्रमुख मिशेल जराऊड   ने एक रिपोर्ट जारी करते हुए बदलते हुए मौसम पर चिंता व्यक्त की है। इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015 वैश्विक स्तर  अब तक का सबसे गर्म वर्ष रहा है और साथ ही साथ यह भी संकेत दिए हैं  आने वाला  वर्ष 2016 ओर भी अधिक गर्म रहेगा। 



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आज से  पेरिस में जलवायु सम्मेलन का आयोजन भी शुरू हो रहा है।  जिसमे अनेके देशो के नेता बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग पर विचार विमर्श करगे ओर साथ ही साथ इससे निपटने के लिए कारगर उपायो  के बारे में भी चर्चा करगे।  विश्व मौसम संगठन के प्रमुख ने  कहा है कि यह पृथ्वी वासियो  के लिए बहुत ही बुरी खबर है 2015 वर्ष के शुरुवाती 10  महीनो की मौसम  सम्बंधित जानकारियो के  अनुसार इन  10  महीने में मापे गए तापमान पिछले सभी वर्षो कि तुलना में सबसे उच्तम स्तर पर थे। 

पेरिस में होने वाले इस जलवायु सम्मलेन में भाग लेने वाले सभी देशो नेता एक विशेष समझोता करेंगे जिसका प्रमुख उदेश्य  ग्लोबल वार्मिंग के प्रमुख कारणों में से एक  ग्रीन हाउस गैसो के बढ़ते उत्सर्जन को नियंत्रित करना है। ग्लोबल वार्मिंग का असर समुद्री जल में भी देखने को मिला है। समुद्री जल के तापमान से सम्बंधित एक शोध के अनुसार पिछले साल समुद्री जल के तापमान में भी काफी वृद्धि पायी गयी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मानव जनित ग्रीन हौसे गैसो का अधिकतर भाग  समुद्र सोख रहे हैं  जिसके कारण समुदर की गहराई में भी पानी का तापमान काफी बढ़  रहा है। 

वर्तमान में अनेक  प्रकार के केमिकल के बढ़ते प्रयोग , उद्योग की चिमनियों  वाले धुएं एवं जहरीली गैसो से , वृक्षों का अंधाधुंध  कटना, इन सब के कारण वातावरण में ग्रीन हाउस गैसो की मात्रा   बढ़ती  जा रही है।   ऐसे में हमारा ये दायित्व है की हम वृक्षों को लगाये ताकि ऑक्सीजन अधिक से अधिक मात्र में वायुमंडल  में बनी  रहे   साथ ही साथ ओधोग मालिको और प्रबंधन को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए की वो ऐसे पदार्थो और प्रिकिर्याओ का उपयोग न करे जिससे ग्रीन हौसे गैसो के उत्सर्जन में बढ़ोत्तरी हो । दोस्तों हमारे पास एक ही तो पृथ्वी है ,अत : हमको इस पृथ्वी पर जीव जन्तुओ के अस्तित्व हेतु प्रकृती के साथ खिलवाड़ बंद करना होगा नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब मानव भी विलुप्त हो जायेगा ।  

Friday, November 20, 2015

इसलिए पीजिये ब्लैक कॉफी !


             "Advantages of  Drinking Black Coffee Every Day"

क्या आप ब्लैक  कॉफी पीते है ? यदि नहीं तो आप अपने बजट को ध्यान में रखकर इसको पीना शुरू कर सकते हैं। लेकिन साथ ही यदि आपको कोई गंभीर बिमारी है तो इसके सेवन से पहले डॉकटर से अवश्य कंसल्ट करे।   किन्तु यदि हमे कोई बीमारी नहीं है तो हम ब्लैक कॉफी के सेवन से इससे होने वाले फायदों का लुत्फ़ उठा सकते  है। प्रतिदिन ब्लैक कॉफी पीने के कुछ प्रमुख फायदे जिनको वैज्ञानिक रूप से सिद्ध किया गया है इस प्रकार हैं -

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  • वैज्ञानिक शोध के आधार पर यह पाया गया है कि प्रतिदिन ब्लैक कॉफी का सेवन लिवर को स्वस्थ बनाये रखने में सहायक है। इसका  सेवन  "लिवर कैंसर" रोग को रोकने में फायदेमंद है। 
  • जब हम कॉफी पीते  हैं, तो कॉफी में पाये जाने वाला  कॉफिन तत्व  हमारे पाचन तंत्र तक पहुचता है, जहा से वह   रक्त धारा के माध्यम से हमारे दिमाग तक पहुचता है। जिसका  फायदा यह है कि यह हमारी एनर्जी , स्मरणशक्ति , बातो एवं समस्याओ के प्रति रेस्पोंस करने की  क्षमता एवं ज्ञान सम्बन्धी चीज़ो के सुधार में सहायक है। 
  • यदि आप अपना वजन काम करना चाहते हैं या फिर अपने आप को अधिक एक्टिव बनाना चाहते  हैं तो कॉफी पिए। कॉफी में मौजूद कॉफिन तत्व मोटापा घटाने में सहायक है।  इसका मतलब यह बिलकुल नहीं है कि आप वजन घटाने के लिए बस कॉफी ही पीते रहे ,इसके लिए आपको व्यायाम भी करना भी जरूरी है। 
  • कॉफी को शरीर के लिए आवश्यक नुट्रिशन के रूप में भी देखा जाता है क्यों कि इसमें विटामिन B2 , B3  B5  एवं  मैग्नीशियम आदि तत्व पाये जाते हैं। 
  • कॉफी का सेवन डिप्रेशन की समस्या को कम  करने में सहायक सिद्ध हुआ है।  वैज्ञानिक शोधो  के अनुसार कॉफी पिने से मष्तिष्क में  डोपामाइन ( Dopamine ) की  मात्र बढ़ती है। यहाँ आपको बता दे कि   डोपामाइन को  Pleasure Chemical  के रूप में भी जाना जाता है।    
  • कॉफी का सेवन दिल से सम्बंधित रोगो से लड़ने में सहायक है। विज्ञान के अनुसार कॉफी को Cardiovascular Health  के लिए अच्छा माना गया है।  
कंप्यूटर साइंस से सम्बंधित आर्टिकल पढ़ने के लिए क्लिक करे Computersciencejunctio

Wednesday, November 18, 2015

Word of The Year 2015


विश्व में सबसे अधिक प्रयोग में होने वाली  ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी ने वर्ष 2015  के लिए एक पिक्टोग्राफ  को   "Word of The Year" के खिताब से नवाजा है .इस पिक्टोग्राफ़ (चित्रलिपि ) का मतलब है "Face with  tears of Joy " . इस पिक्टोग्राफ को emoji  शब्द के रूप में भी  जाना जाता है. यह पिक्टोग्राफ  स्व्भाव , मनोदशा एवं चिंता आदि को सही रूप से दर्शाता है . 

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वैसे तो पिक्टग्राफ और emoji सन  1997 से ही पहचान में आ गए थे . लेकिन सन 2015  में पिटोग्राफ एवं emoji शब्द का प्रयोग  सबसे अधिक किया गया . इस वर्ष ऑक्सफ़ोर्ड यूनीवर्सिटी  प्रेस ने मोबाइल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र की  कम्पनी  SwiftKey के साथ मिलकर विश्व में सबसे अधिक प्रयोग होने वाले पिक्टोग्राफ का पता लगाने के लिए एक अधयन्न  किया किया और जिसमे उन्होने पाया कि वैश्विक स्तर पर वर्ष 2015 में को सबसे अधिक प्रयोग किया गया हैं .

SwiftKey कम्पनी ने अपने अध्यन्न में पाया कि इंग्लैंड  में वर्ष 2015 में उपयोग होनी वाले सभी पिक्टोग्राफ की संख्या का 20%  हिस्सा केवल अकेले का था . जबकि अमेरिका में इसका हिस्सा सभी प्रयोग होने वाले पिक्टोग्राफ की संख्या का  17 % था . जबकि यह प्रतिशत वर्ष 2014 में इंग्लैंड में में मात्र 4 % और अमेरिका में  9%  था . 

emoji एक छोटा डिजिटल चित्र और आइकॉन है, जो किसी विचार या भावना  को  इलेक्ट्रॉिनक्स तरीके से सुचना एवं  संवाद  के क्षेत्र में व्यक्त करने के लिए प्रयोग होता है . emoji शब्द  जापान की भाषा से  लिया गया है . अब तक के इतिहास  में ऐसा पहली बार हुआ है कि ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी में किसी पिक्टोग्राफ ( चित्रलिपि ) को "Word of the Year"  के खिताब से नवाजा हो . 

चलते चलते आपको बता दे कि इससे पहले वर्ष 2014 , 2013 एवं 2012 में क्रमशः "Vape" , "Selfie", "Omnishambles" शब्दों  को ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी द्वारा " Word of The Year" के खिताब   नवाजा जा चूका है .

Sunday, November 15, 2015

एक लैबोरेटरी ऐसी भी !



दोस्तों जिस तरह से स्टूडेंट लोग के स्कूल और कॉलेज में एक लैब होती है। जिसमे वह  क्लास में पढाये गए थियोरिटिकल सिद्धांतो के लिए एक्सपेरिमेंट  करते हैं , उनके परिणामो को ऑब्जर्ब  करते हैं  , जिससे विषय के प्रति उनकी समझ और अच्छी होती है और साथ ही साथ इससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है।  ऐसी ही एक लेबोरेटरी हम सब के आस पास भी है। चाहे  हम जहा भी रहे, जहा भी काम करे  हर जगह  हमारे आस पास  एल लेबोरेटरी होती है। बस कमी  यह है कि  हम कभी इस लेबोरेटरी को ऑब्जर्ब नहीं करते। अंतर इतना है कॉलेज या स्कूल की लैब के तरह  हमारे आस पास की आस पास की इस लबोरटरी में हमको यंत्रो या औजारो की कोई जरूरत नै है। तो फिर हम एक्सपेरिमेंट कैसे करेंगे ? दरसल हमारे आस  पास की इस लेबोरेटरी में कई तरह के लोग है।  हमे उनको ऑब्जर्ब करना है . उनके जीवन की सफलताओ और असफलताओ को ऑब्जर्ब करना है। 


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अपने आस पास के इन लोगो के जीवन से जुडी घटनाओ ,उनकी कमियां एवं उनकी विशेषताओ का अधयन्न  करके ,  हम काफी कुछ सिख सकते हैं।  अगर हमारे आस  पास की इस लेबोरेटरी में कोई सफल व्यक्ति है तो हमको उसके  पास जाकर  कुछ बात चीत  करनी  चाहिए हमे पता लगाना चाहये की वह व्यक्ति कठिन परिस्थितयो में किस प्रकार  से उनका सामना करता है। अगर इस लेबोरेटरी में किसी व्यक्ति को सब लोग पसनद करते हैं , उसकी सबसे  बनती  हैं तो हमे उस व्यक्ति की उन  सभी खूबियों को  ऑब्जर्ब करना होगा , उनको स्टडी करना होगा।  

 इसी प्रकार से हम अपने आस  पास की इस लेबोरेटरी में सफल ही नहीं बल्कि एक  असफल  व्यक्ति से भी काफी कुछ सीख सकते हैं।  अगर कोई असफल है तो हमको उसकी उन  सभी गलतियों को ऑब्जर्ब करना है जो उसने की हैं ताकि हम  उन गलतियों  को अपने जीवन में न  दोहराये  और यदि हमारे सामने  भी इस तरह की परिस्थति आती   हैं तो हमको उनका समाधान किस तरह से करना है  यह भी हम सीख पायेगे। 

तो फिर देर किस बात की है। अपनी   इस लेबोरेटरी में  आस पास के सभी सफल और असफल व्यक्तियों  के जीवन बातो को ऑब्जर्ब करना , लाइफ  में उनके इम्प्लीमेंटेश करने के नतीजे को स्टडी करना , यदि फायदेमंद हो तो उनको खुद की लाइफ में भी  इम्प्लीमेंट करना  शुरू कर दीजिये।  



Wednesday, November 11, 2015

अच्छाई को खोने ना दे !


दोस्तों आज दीपावली का त्यौहार है। दीपावली बुराई पर अच्छाई की जीत का त्यौहार है। आज के माहौल में अच्छाई कही खो सी गयी है।  बुराई से मेरी मुलाकात अक्सर रोज होती है, एक नहीं कई बार होती है , लेकिन अच्छाई से बहुत कम  होती  है।  लोगो को छोटी छोटी बातो पर लड़ते झगड़ते हुए , गाली गलौच करते हुए रोज देखना होता है। न्यूज़ चैनल पर एक पार्टी के नेताओ को दूसरी पार्टी के नेताओ पर जहर उगलते हुए , अमर्यादित  भाषा का इतेमाल करते हुए  रोज देखना  एवं  सुनना  होता  है। चोरी ,लूटपाट , हत्या ,बलात्कार, नशाखोरी आदि की घटनाओ को भी रोज देखने सुनने को मिलता है। परन्तु न्यूज़ चैनलों पर या अखबारों में समाज में अच्छाई का  सन्देश देने वाली जीवित  घटनाओ का होना ऐसे  उदाहरण बहुत काम देखने और सुनने को मिलते हैं।   यही बात हम अपने आस  पास , गली, मौहल्ले या गाव, शहर  में देखने को मिलती है।  आखिर ऐसा क्यों ? ऐसा इसलिए क्यों कि  हम अपने नैतिक मूल्यों की अहमियत को भूलते जा रहे हैं। 


                             

हम अपने नैतिक कर्तव्यो का निर्वाह सही से नहीं कर रहे हैं। नैतिक मूल्यों की अहमियत को भूलते जा रहे हैं। बस केवल अपने स्वार्थ अपनी इच्छाओ को पूरा करने में लगे हैं। अपनी इच्छाओ को पूरा करना कोई गुनाह नहीं है, लेकिन हम किस रास्ते पर चलकर उसको पूरा करते हैं। यह जरूर सोचनीय है। जीत हासिल करने का या अधिक  अमीर बन जाने का मतलब यह समझ लेना नहीं की बस अब तो हम ही हम है। दिवाली के इस त्यौहार पर बस यही कहुगा की हमको अपने अंदर अच्छाई का दीप जलाये रखना है। यह अच्छाई किसी भी रूप में हो सकती है दूसरो के साथ व्यवहार में प्रेमभाव बरतना , बच्चो को अच्छे संस्कार देना , दूसरो के दुःख में उनका साथ देना , बीमार ,असमर्थ और  असहाय लोगो की अपनी सामर्थ्य की अनुसार मदद करना, इन भावनाओ एव आशाओ की साथ सभी पाठकगणों एवं देशवासियो को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये !


Monday, November 9, 2015

तेज दिमाग चाहिए,तो इन आदतो को अपनाइये !


दोस्तों कहते हैं कि मानव शरीर को स्वस्थ रखने में  शारीरिक व्यायाम का अपना विशेष महत्व है।  शरीर के प्रत्येक अंग के लिए अलग अलग प्रकार  के व्यायाम और योग आदि क्रियाएं हैं।  दिमाग मानव शरीर का सबसे महत्वपूर्ण  हिस्सा है, लेकिन इसके लिए व्यायाम  करना हम अक्सर भूल जाते हैं। 

आज के समय में किसी भी क्षेत्र में जिंदगी में कुछ हासिल करने के लिए तेज दिमाग का होना बहुत आवश्यक  है।  तेज दिमाग हमारी स्मरण शक्ति को सही बनाये रखता है, हमारे सोचने , हमारे दैनिक कार्यो को करने के तरीके , हमारे व्यवहार , हमारी  कार्यकुशलता जैसी सभी महत्वपूर्ण बातो के लिए भी काफी फायदेमंद है। क्या आप भी अपने मष्तिष्क को तेज बनाना चाहते हैं  ? यदि हाँ तो आपको अपनी दिनचर्या में निम्नन अादतो को शामिल करना होगा। 



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1. Improve Your Reading Skills

आपको अपने मष्तिष्क को तेज बनाने के लिए पढ़ने की आदत को अपनी दिनचर्या में शामिल करना है। अपने खाली समय में  आप कोई उपयोगी किताब , न्यूज़ पेपर  या कोई नोवल आदि पढ़ सकते हैं।   वैज्ञानिको का मत है कि पढ़ाई करने की  हैबिट से  मष्तिष्क की ब्रेन की क्रियाए  बढ़ती हैं।  पढ़ने  की आदत दिमाग के उन सभी हिस्सों को स्वस्थ बनाये रखती है जो प्रॉब्लम सॉल्विंग में मदद करते  है और साथ ही साथ मेमोरी को भी तंदरुस्त बनाये रखती है। 

2. Exercise on Regular Basis

वैज्ञानिको के मत के अनुसार शारीरिक व्यायाम करने से हमारे शरीर में खून में BDNF  नाम का प्रोटीन बनता है। जब यह खून मष्तिष्क तक पहुचता है तो ब्रेन इसको अवशोषित करती हैं जिसके कारण याददाश्त और एकाग्रता दोनों ही बढ़ती है। 

3. Learn New Language

वैज्ञनिको द्वारा किये गए शोध में यह पाया गया है कि किसी नयी भाषा को सिखने  का हमारे मष्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव  पड़ता है।  इसलिए हमे किसी नयी भाषा के शब्दों को लिखना ,पढ़ना , उनके अर्थो को समझना जैसी क्रियाओ पर ध्यान देना चाहिए। 


4. Solve Puzzles and Reasoning Problems

दिमाग को तेज बनाये रखने के लिए को  Puzzle Solving  Skills के रेगुलर  प्रैक्टिस करनी चाहिए।  जिसके लिए आप को बुक भी खरीद सकते हो साथ ही साथ Reasoning Ability से सम्बंधित सवालो को हल करने की प्रक्टिक्स करनी चाहिए। 

5. Meditation/Yoga

वैज्ञानिको ने Meditation को भी दिमाग के लिए काफी महत्वपूर्ण बताया है। Meditation  से  इन्द्रियों को कंट्रोल करने के शक्ति बढ़ती ही जिसके कारण एकाग्रता एवं मेमोरी भी बढ़ती है ,साथ ही साथ एक शोध में यह भी पाया गया है की जो छात्र Meditation /Yoga करते हैं वह टेस्ट में अच्छा परफॉर्म करते हैं। Meditation तनाव और उत्तेजना को भी नियंत्रित करता है। 

Saturday, November 7, 2015

ऑफिस में रखे इन बातो का ध्यान !

            
कभी कभी अपनी जॉब के दौरान अक्सर हमको ऐसे दिनों का सामना भी करना पड़ता है कि जब हम अपना कार्य पूरी मेहनत के साथ कर रहे होते हैं और अच्छा रिजल्ट भी  कम्पनी को देते हैं, लेकिन फिर भी हमारे द्वारा किये गए कार्य को नोटिस नहीं किया जाता है , उसको महत्व नहीं दिया जाता।  जरा सोचिये की कैसा महसूस करते हैं हम अपने इन क्षणों में ?


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यदि हमारे साथ ऐसा होता है तो यह हमारे करियर की प्रगति में  में अड़चन साबित हो  सकता है।  इसलिए जिस संस्थान में , जिस  कंपनी में हम जॉब करते हैं, वहा हमको जॉब करते समय स्पष्ट कम्युनिकेशन पर विशेष ध्यान देना होगा।  हमे कोशिश यह  कोशिश करनी होगी की हमारे दवरा किये कार्य और उसके अच्छे परिणाम को अनदेखा न किया जाये।  

प्रोफेशनल माहौल में काम करते समय हमको इस बात का विशेष ध्यान रखना चहिये कि दूसरो के साथ बात करते समय हमारे संवाद  में  विन्रमता  होनी चाहिए।  साथ ही साथ यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हमारे संवाद से किसी की  भावनाओ को तो ठेश नहीं पहुंच रही है।  .


हमको अनावश्यक बातचीत में खुद को व्यस्त नहीं करना चाहिए हो सके तो इनको अनदेखा और अनसुना करना चाहिए। यदि  आपके पास कोई बेहतर आईडिया है जो आपकी कंपनी और आपकी पर्सनल ग्रोथ में सहायक हो लेकिन अगर आप आईडिया को लेकर  स्पष्ट संवाद नहीं कर सकते तो यह आपके करियर की प्रगति में एक अड़चन है इसलिए अपने आईडिया को कुशलतापपूर्वक म विन्रम रूप से पेश करे।  

कर्मचारियों के बीच स्पष्ट  और असरदार संवाद  कार्य  माहौल को विश्वसनीय एवं स्वस्थ बनाये रखता है। यदि कंपनी में  आपके साथ का कोई कर्मचारी आपसे मदद के लिए कहता है तो उसको मना न करे,  उसकी मदद  करे।  यदि  आप ऐसा करते हैं तो जल्द ही वही लोग जरूरत पड़ने पर आपकी भी मदद करेंगे।  

यदि आपको आपके कार्य के अच्छे परिणामो के कारण  भी अनदेखा किया जा रहा है और ऐसे कर्मचारियों को महत्व दिया जा रहा है जो आपकी अपेक्षा काम मेहनत  करते हैं या जिनका कार्य परिणाम सही नहीं है  तो आप अपनी बात को तर्क सहित , कुशलतापूर्पक ,विन्रम रूप से मैनेजमेंट के अधिकारियों के समक्ष रक सकते हो। लेकिन बेहतर होगा की ऐसा करते समय आप केवल अपने कार्य और उसके परिणामो को सामने रखे , दूसरो का जिकर न करे।  यदि आपका कार्य कठिन है या आप उसमे विफल हो तो निराश न हो फिर से कोशिश करें। 

Saturday, October 31, 2015

क्या कहती है विश्व स्वास्थ्य संगठन की यह रिपोर्ट ?


अभी हाल में विश्व स्वास्थय संगठन द्वारा  "Global Tuberculosis Report 2015 "  को   जारी किया गया  है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2014  में टी.बी . की बीमारी के कारण 15  लाख लोगो की मृत्यु हुयी है। इस रिपोर्ट के अनुसार  वैश्विक स्तर पर 2014  भारत, इंडोनेशिया और चीन में टीबी के सबसे ज्यादा मामले सामने आए जो कि क्रमश: 23 प्रतिशत, 10 प्रतिशत और 10 प्रतिशत हैं। पिछले साल नाइजीरिया, पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका में भी टीबी के मामलों की संख्या ज्यादा रही है।  हमारे देश यानी की भारत में गत वर्ष टी.बी.  के सबसे अधिक मामले सामने आये हैं।  रिपोर्ट के अनुसार  भारत और नाइजीरिया में टीबी से होने वाली मौतें वैश्विक तौर पर इस बीमारी से होने वाली मौतों का एक तिहाई है।

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वाशिंगटन में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी की गयी इस  रिपोर्ट में बताया गया है सं  2000 से 2015 के बीच टी.बी. के द्वारा  मरने वाले मरीजों की संख्या पर काफी हद तक काबू पा  लिया गया था  सं 2000 में इस हेतु की स्थापना की गयी थी जिसके कारण इस हेतु चलाये गए जागृति अभियान एवं   सही उपचार , दवाइयों आदि के कारण  सारे विश्व में 430 लाख लोगो की जिंदगियो को बचाया गया था। साथ ही साथ इस रिपोर्ट में यहाँ भी बताया गया है 2014 में टी.बी की वझे से जिन 15 लाख लोगो की जाने गयी हैं उनमे से 4 लाख HIV से भी ग्रस्त थे। 



विश्व स्वास्थ्य संगठन   के Global TB Programme के निर्देशक Dr Mario Raviglione के अनुसार सन  2000 से अब तक  प्रत्येक  वर्ष टी.बी से मरने वाले लोगो की संख्या में 1.5 % की गिरावट आई है।  लेकिन उन्होने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की की जहा एक ओर वर्तमान समय में हर प्रकार की दवाये एवं  बेहतर   उपचार  भी उपलब्ध है फिर भी   हर दिन  4400  लोग टी. बी के कारण अपनी जाने गवा रहे हैं। इसलिए   अभी इस हेतु हमे और अधिक प्रयास करने की जरूरत है ताकि टी.बी से होने वाली  मौतों पर काबू पाया जा सके। 

इस रिपोर्ट की अधिक जानकारी के लिए आप रिफरेन्स में दिए गए लिंक पर क्लिक कर सकते हैं। 




Sunday, October 25, 2015

अब तारो के भीतर चुंबकीय क्षेत्र का पता लगाना हुआ आसान !


हाल ही में वैज्ञानिको ने तारो के अधयन्न से सम्बंधित एक नयी  रिसर्च में सफलता हासिल की है।  वैज्ञानिकों ने पहली मरतबा  एक ऐसी  तकनीक को बनाने में सफलता प्राप्त की है जिसकी मदद से कंपायमान बड़े बड़े  तारों के भीतर चुंबकीय क्षेत्र की उपस्थिति  के बारे में पता लगाया जा सकता है।  इस तकनीक की ख़ास बात यह है कि यह तकनीक मेडिकल अल्ट्रासाउंड से काफी मिलती जुलती है। इस तकनीक की मदद से वैज्ञानिक तारो की उन  आंतरिक विशेषताओ  के  बारे में पता लगा सकते हैं जो अब तक छिपी हुयी थी।

यदि हम तारो के सन्दर्भ में चुम्बकीय क्षेत्र की बात करे तो  किसी भी  तारे के निर्माण से लेकर इसके समाप्त होने तक उसके विकास  के सभी स्थितिओ  में चुंबकीय क्षेत्र  का अपना विशेष  महत्व होता  है। इस शोध से जुड़े शोधकर्ताओं ने तारों के भीतर के गुण धर्मो  का पता लगाने हेतु  उनसे होकर गुजरने वाली तरंगों को पकड़ने के लिए तारकीय भूकंप विज्ञान का प्रयोग  किया है ।
इस शोध में शामिल  वैज्ञानिक  "University of California Santa Barbara" के  "Kavli Institute for Theoretical Physics (KITP) " में कार्यरत हैं। शोध से जुड़े हुए एक प्रमुख वैज्ञानिक  Matteo Cantiello ने इस शोध के सम्बंध् में  कहा है कि , ‘अब हम तारे के उन क्षेत्रों की जांच कर सकते हैं जो पहले छिपे हुए थे।  यह तकनीक मेडिकल अल्ट्रासाउंड के समान है जिसमें मानव शरीर के दिखाई न देने वाले हिस्सों की तस्वीर उतारने के लिए ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है।’

इस तकनीक के प्रयोग के दौरान शोधकर्ताओं  ने पाया की  जब किसी तारे के भीतर अधिक चुम्बकीय क्षेत्र उपस्थित होता है तो यह चुम्बकीय क्षेत्र  गुरत्वीय  तरंगो की गति को रोक   देता है जिसके कारण  तरंगो की ऊर्जा  क्षय होने लगती है  और ये तरंगे तारे के भीतरी क्षेत्र में ट्रैप हो जाती हैं जिनके अध्ययन से तारे की  आंतरिक विशेषताओ का पता लगाया जा सकता है।  शोधकर्ताओं ने इस क्रिया को "Magnetic Greenhouse Effect" नाम दिया है । 

हम  आशा करते हैं कि भविष्य में इस  तकनीक के प्रयोग से तारो से सम्बंधित अध्यन्न के बारे में नयी नयी विशेषताओ  और बातो के बारे में जानकारी हासिल हो सकेगी। 



Tuesday, October 13, 2015

देर रात तक जागने वाले टीन एजर हो रहे मोटापे के शिकार !


वर्तमान समय में विद्यार्थी वर्ग में अधिकतर छात्र ऐसे हैं जो रात में देर रात तक जागते रहते हैं अब देर रात तक जागने का   कारण पढ़ाई करना भी हो सकता है या फिर अपने दोस्तों से मोबाइल सोशल मीडिया साइट्स पर या व्हाटप्प्स पर चैट  करना भी हो सकता है .आजकल इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और मोबाइल डिवाइस पर   बच्चों का रातभर व्यस्त रहना एक मामूली बात  हो गई है। इनके माता पिता भी इस और कोई अधिक ध्यान नही देते , जिस कारण  से बच्चो की हिम्मत और बढ़ जाती है।  परन्तु  इससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा  असर पड़ता है, इसका बात का खुलासा  एक ताजा शोध में हुआ है।


हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार जो बच्चे देर रात तक जगे रहते हैं उनको  पांच सालों के अंदर मोटापे का शिकार होने की संभवाना  बढ़ जाती है। इस शोध के अनुसार  जल्दी सोने वाले बच्चों की तुलना में देर रात तक जागने वाले वयस्क अथवा बच्चों का वजन बढ़ने की संभावना अधिक  होती है। इसलिए अगर टीनएजर बच्चा रातभर जागता है, तो उसके माता पिता या बड़े भाई बहन  उसे जल्द यह आदत छोड़ने के लिए जरूर कहे। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया बर्कले में बाल-विशेषज्ञ लॉरेन असरनाउ  के निर्देशन  में यह शोध किया  गया। इस शोध  में  लगभग पांच सालों तक 3,300 से भी ज्यादा टीनएजर और एडल्ट्स को इस रिसर्च में शामिल किया गया। हाल ही में इस शोध के बारे में   'स्लीप' नाम की मैगजीन में विस्तार से छपा है।

लॉरेन असरनाउ ने कहा  कि किसी नतीजे पर पहुचने से पहले इस  शोध  के दौरान टीन एज से लेकर उनके एडल्ट होने तक उनमें होने वाले शारीरिक परिवर्तन का बड़ी सूक्ष्मता से  अध्ययन किया गया है । इस दौरान उन्होंने कितने घंटे की नींद ली, ये सारे आंकड़े जुटाए गए। शोधकर्ताओं  ने पाया कि इस शोध में शामिल जिन टीन  एजर्स ने रात के दौरान  एक घंटे की नींद नहीं ली तो उनका बॉडी मास इन्डेक्स (बीएमआई) 2.1 प्वॉइंट बढ़ गया। इस तरह पांच साल के अंदर उनका मोटापा और भी बढ़ता गया।
 जो  में जो परिणाम सामने  आए हैं उसके मुताबिक, ज्यादातर टीन एजर रात में नौ घंटे की नॉर्मल नींद भी नहीं लेते हैं। इस वजह से उन्हें स्कूल में जगे रहने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। रिसर्च के मुताबिक, वक्त पर सोने वाले टीनएजर जैसे जैसे बड़े होते हैं, उनका मोटापा नहीं बढ़ता। साथ ही साथ  उनकी बॉडी शेप में बनी रहती है। 

Wednesday, September 16, 2015

आखिर क्यों है इतना कुपोषण ?


हमारा देश ऋषि मुनियो के समय से ही प्रकृति की एक अद्भुत देन है। जहा पर अनेक प्रकार के औषधीय पौधे ,जड़ी बूटी, फल फूल , मेवे , आनाज फसल , वनसप्ति , घी ,दूध सभी चीज़ो का भण्डार  हमेशा से रहा है।  हमारे देश में उन सभी चीज़ो का पर्याप्त भण्डार है जो एक स्वस्थ शरीर के लिए आवश्यक हैं किन्तु फिर भी आज अनेक लोग ऐसे हैं जो कुपोषण के शिकार हैं क्यों की उनको पौष्टिक आहार नही मिल पाता। 

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अगर हम वर्तमान समय की बात करे तो हम पायेगे की हम पैसा कमाने के चक्कर में इतने लालची हो गए हैं की हर चीज़ में मिलावट करने लगे हैं।  दूध ,घी से लेकर फलो एवं सब्जी आदि में रासायनिक पदार्थो को मिलाने लगे हैं।  महंगाई ने इतनी कमर तोड़ राखी है की गरीब  आदमी प्रतिदिन फलो एवं दूध आदि का सेवन भी नही कर पाता। यह हमारे देश की विडंबना ही है की जहा एक ओर मंदिरो के आगे बैठे ,चौराहो  पर बैठे बच्चे एवं बड़े 2 वक़्त की रोटी के लिए मोहताज हैं ,घी दूध तक नसीब नही हो पाता, वही दूसरी ओर अंधविश्वास में डूबे लोग मंदिरो में शिवलिंग पर दूध चढ़ाकर  इतना दूध व्यर्थ करते हैं। जरा सोचिये अगर यही दूध इन जरूरतमंदो को मिलता तो कितना अच्छा होता। 
अभी हाल ही में आई एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार आज सारे विश्व में हर 3 व्यक्तियों में से 1  व्यक्ति कुपोषण का शिकार है। हर देश में आज कुपोषण एक गंभीर समस्या है। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। हाल ही में "थिंक टैंक इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईएफपीआरआई)" की ओर  से जारी की गयी ग्लोबल न्यूट्रीशन रिपोर्ट के अनुसार  कुपोषण समाधान के लिए जो उपाय  हैं उन्हें धन, कौशल या राजनीतिक दबाव के कारण लागू किये जाने पर ध्यान नहीं दिया  जा रहा है। 
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि  ‘कुपोषण बदलाव का वाहक या प्रगति का बाधक भी हो सकता है" इसलिए  हर देश के नेताओं को कुपोषण को गंभीरता के साथ लेना चाहिए। इसे किसी भी रूप में खत्म करने का प्रयास करना चाहिए।’ आईएफपीआरआई के वरिष्ठ शोधार्थी और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक लॉरेंस हड्डाड ने एक बयान में कहा, ‘जब हममें से हर तीन में एक व्यक्ति अक्षम है तो परिवार, समुदाय और देश के तौर पर हम आगे नहीं बढ़ सकते' . बात भी सही है अगर तीन लोगो में से हर एक लोग कुपोषण का शिकार होगा तो हम कहा से उन्नति करेंगे ?

Thursday, September 10, 2015

आपके पर्श में रखे नोट आपको कर सकते हैं बीमार !


क्या हम कल्पना  कर सकते हैं कि हमारी जेब में रखे पर्श में रखे नोट हमको बीमार भी कर सकते हैं ? शायद नही ! पर ऐसा हो सकता है क्यों कि हमारे पर्श में जो नोट रखे होते हैं उन पर रोग उतपन्न  करने वाले सूक्ष्म जीवाणु लगे हो सकते हैं।  जिनके कारण  त्वचा रोग, पेट की बीमारियों और यहां तक कि तपेदिक जैसी
बीमारी  भी हो सकती है। अभी हाल ही में  वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान केंद्र (CSIR) और जिनोमिक्स एण्ड इंटीग्रेटिव बायलॉजी (IGIB) संस्थान द्वारा किए गए शोध  के अनुसार एक नोट में औसतन कवक (70 फीसदी), बैक्टीरिया (9फीसदी) और विषाणु (एक फीसदी से कम) जीव होते हैं।



IGIB के प्रधान वैज्ञानिक एवं इस शोधपत्र के लेखक एक एस रामचंद्रन जी के अनुसार ‘उन्होने  स्टेफाइलोकोकस ऑरियस और इंरटकोकस फेकैलिस समेत 78 रोगजनक सूक्ष्मजीव की पहचान की है। उनके  विश्लेषण से यह भी पता चला है कि कागज के इन नोट (मुद्रा) पर विविध प्रकार के सूक्ष्मजीव होते हैं और कई एंटीबायोटिक प्रतिरोधी भी होते हैं।’

यदि हम उनके द्वारा लिखे गए शोधपत्र पर प्रकाश डाले तो हम पायेगे की  नोटों के इन रोगजनक सूक्ष्मजीवों से चर्मरोग, कवक और पेट  के संक्रमण, सांस संबंधी परेशानियां और यहां तक तपेदिक भी हो सकती है।

अपने इस शोध के नतीजे तक पहुचने के लिए उन्होने देश की राजधानी  दिल्ली  में रेहड़ी पटरीवालों, किराने की दुकानों, कैंटीन, चाय की दुकानों, हार्डवेयर की दुकानों, दवा की दुकानों आदि से नमूने इकट्ठे किए । उनमें 10, 20 और 100 रुपए के नोट थे जिन पर इन रोगजनक सूक्ष्म जीवाणु को पाया गया जिनका व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है।

यदि हम आस्ट्रेलिया जैसे कुछ अन्य  देशों की बात करे तो वह पर प्लास्टिक के नोटों का प्रचलन है नोट की लाइफटाइम ज्यादा होने के साथ साथ इसका एक कारण  यह भी है कि इन नोटों को इन रोगजनक सूक्ष्म जीवाणु से मुक्त रखा जा सकता है।  इसलिए यह बहुत आवश्यक है की हमको  स्वच्छता के तौर तरीके अपनाना चाहिए तथा इन नोटों को संभालने के बाद किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचने के लिए हाथ को रोगाणुमुक्त कर लेना चाहिए।’

Friday, September 4, 2015

भारतीय वैज्ञानिक डॉ एम. विजय गुप्ता को मिला पहला सुनहाक शांति पुरूस्कार!

आजकल  अक्सर कभी कभी मुझे यह महसूस होता है कि हमारे देश में कुछ व्यक्तिव ऐसे हैं जिनको उनके द्वारा किये गए महत्वपूर्ण कार्यो के लिए , समाज हित में किये गए कार्यो के लिए हमारे देश में उनको  उतना मान सम्मान नही मिल पाता है ,जिसके योग्य वह है। किन्तु विदेशो में उनके कार्यो की न सिर्फ सरहाना की जाती है बल्कि उन्हे सम्मानित भी किया जाता है। हमारे देश का सिस्टम इतना राजनितिक हो चूका है कि यहाँ चुनाव  , किसी अफसर पद पर  चयन से लेकर सम्मान और पुरुस्कारों के लिए नामांकन में भी  राजनीति होती है।  इसका एक ताजा उदाहरण पुणे स्थित फिल्म संस्थान में  अध्यक्ष पद हेतु अभिनेता गजेन्द्र चौहान जी को चुना गया , इसके पीछे भी राजनितिक कारण  बताये जा रहे हैं। 

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खैर यह इस पोस्ट का मूल विषय नहीं है। दरसल अभी हाल ही में भारत और कई देशों में मत्स्य पालन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण  कार्य करने वाले प्रसिद्ध भारतीय कृषि वैज्ञानिक डॉ एम. विजय गुप्ता ( Dr Modadugu Vijay Gupta ) को नोबेल पुरस्कार के विकल्प के तौर पर देखे जा रहे पहले सुनहाक शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्होने अपना यह पुरूस्कार किरिबाती के राष्ट्रपति Anote Tong के साथ शेयर किया है। किरिबाती एक द्वीपीय देश है। 


76 साल के डॉ एम विजय गुप्ता जी को पुरूस्कार  स्वरुप 10 लाख डॉलर की राशि प्रदान की गयी है। डॉ एम विजय गुप्ता  जी को यह सम्मान छोटे द्वीपीय देशो में कार्बन उत्सर्जन को काम करने की दिशा में किये गए महत्वपूर्ण कार्यो के लिए दिया गया है।  यह दीव बढ़ते समुंद्री जल स्तर के कारन 2050  तक डूबने जैसे खतरे का सामना कर रहा है।  उनको यह पुरूस्कार दक्षिण कोरिया की धार्मिक नेता डॉ. हाक जा हान मून ने प्रदान किया। डॉ. हाक जा हान मून स्वर्गीय रेव सुन म्युंग मून जी की पत्नी हैं। जिन्होंने लोगों की भलाई के लिए, स्तर बेहतर बनाने हेतु कारगर प्रयास कर रहे लोगों के काम को मान्यता देने के लिए इस पुरस्कार की स्थापना की थी। 

डॉ एम विजय गुप्ता जी मूल रूप से आंध्रः प्रदेश के बापतला के रहने वाले हैं और वह एक जीव वैज्ञानी है। उन्हे सन 2005 में  मीठे पानी में मछलीपालन  के लिए कम लागत की तकनीकों के विकास एवं प्रसार के लिए 2005 में विश्व खाद्य पुरस्कार भी दिया जा चूका है। नौकरी से रिटायरमेंट से पहले वह वर्ल्डफिश नाम के एक अंतरराष्ट्रीय मत्स्य पालन शोध संस्थान में सहायक महानिदेशक पद पर भी कार्य कर चुके हैं । यह संस्थान मलेशिया में पेनांग में स्थित "Consultative Group on International Agricultural Research "(CGIAR) के अंतर्गत आता है। 

इस क्षेत्र में डॉ एम विजय  गुप्ता जी ने अपने करियर की शुरुवात कोलकाता स्थित Indian Council Agriculture Research से एक वैज्ञानिक के तौर पर की थी। डॉ एम विजय गुप्ता जी लाओस , बांग्लादेश , वियतनाम , फिलीपींस , थाईलैंड आदि देशो में भी कार्य कर चुके हैं। डॉ एम विजय गुप्ता जी मुख्य रूप से एक्वा टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञ हैं। उनका कहना है कि  एक्वा टेक्नोलॉजी खाद्य सुरक्षा हेतु एक अच्छा विकल्प है जो की ग्रामीण क्षेत्रो के लोगो के जीवन सुधार में भी सहायक है। 

डॉ एम विजय गुप्ता जी अनेक देशो के विभिन्न राष्ट्रीय स्तर के कृषि  संस्थानों में कार्य कर चुके हैं। डॉ एम विजय गुप्ता जी ने बांग्लादेश में ग्रामीण क्षेत्रो में रह रहे लोगो को मछली पालन ( Fish Farming ) के लिए न सिर्फ प्रेरित किया बल्कि उनके साथ लगकर इस हेतु कार्य भी किया एवं उन्हे इस फिश फार्मिंग के महत्वपूर्ण तरीको को भी सिखाया। 

उनके अनुसार जब तक विश्व में खाद्य सुरक्षा के इंतज़ाम नहीं होगे तब तक आप किसी भूखे व्यक्ति से शान्ति के बारे में बात नही कर सकते। खाद्य सुरक्षा एक आवश्यक विषय है जिस पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। 

Wednesday, September 2, 2015

फोटोनिक टेक्नोलोजी के बढ़ते कदम !



एक समय था जब केवल मेकेनिकल और ऑटोमोबाईल के क्षेत्र में नयी नयी मशीनो को बनाया  जा रहा था । फिर समय आया इलेक्ट्रोनिक्स का जिसमे टीवी से लेकर मोबाईल ,कंप्यूटर तक सभी प्रकार कि इलेक्ट्रोनिक्स मशीनो को बनाया  गया और इलेक्ट्रोनिक्स के क्षेत्र में जितने विकास हुए शायद  ही किसी अन्य क्षेत्र में इतने हुए हो।इलेक्ट्रोनिक ने मानव जीवन को बिलकुल बदलकर रख दिया । 

यदि 20 वी सदी को इलेक्ट्रोनिक्स युग का नाम दिया जाए तो ये गलत नहीं होगा। जैसा कि आज हम सभी प्रकार के इलेक्ट्रोनिक्स यंत्रो का उपयोग कर ही रहे हैं।लेकिन जरा कल्पना करो कि क्या 21  वी सदी में इलेक्ट्रोनिक्स का स्थान कोई ले पायेगा ? ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा। लेकिन फोटोनिक टेक्नोलोजी के क्षेत्र में हो रही नई नई खोजो और इनके बड़ते उपयोग को देखकर लगता है कि ये भी इलेक्ट्रोनिक्स टेक्नोलजी से कम नहीं है।




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फोटोनिक यानी प्रकाश का उपयोग कर सूचना को हासिल करना, आगे पहुंचाना और प्रोसेस करना। यह रिसर्च का हाईटेक क्षेत्र है। इसका विकास ऑप्टिकल टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक्स के फ्यूजन से हुआ है। फिजिक्स की इस शाखा में फोटॉन यानी प्रकाश के मूल तत्व का अध्ययन होता है। लेसर गन,काप्टिकल फाइबर्स, ऑप्टोमेट्रिक इंस्ट्रुमेंट्स आदि पर रिसर्च भी इसी के तहत होती है। इसे अगली पीढ़ी यानी 21वीं सदी की तकनीक माना जाता है। ठीक उसी तरह जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स को 20 वीं सदी की तकनीक माना जाता है। हालांकि फोटोनिक युग की शुरूआत 60 के दशक में लेजर की खोज के साथ ही हो गई थी। इसने 70 के दशक में टेलिकम्युनिकेशन में अपना असर दिखाया। 


इसके नेटवर्क ऑपरेटर्स ने फाइबर ऑप्टिक्स डाटा ट्रांसमिशन का तरीका अपना लिया। इसीलिए काफी पहले ही गढ़ा जा चुका शब्द फोटोनिक्स आम प्रचलन में आया 80 के दशक में। अभी कुछ सालों से टेलिकम्युनिकेशन, कंप्यूटिंग, सुरक्षा और कई अन्य प्रक्रियाओं में फोटोनिक्स का उपयोग आधारभूत तकनीक के रूप में होने लगा है। इससे न सिर्फ काम की स्पीड कई गुना बढ़ जाती है बल्कि वह प्रभावशाली भी हो जाता है। इसका उपयोग बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायलॉजी, मेडिसिनल साइंस, सर्जरी और लाइफ साइंस में भी होता है। अब औद्योगिक उत्पादन, माइक्रोबायलॉजी, मेट्रोलॉजी में भी इसका उपयोग होने लगा है। कुछ भी कहो पर विज्ञान ने 50 सालो में इतनी तरक्की कर ली है तो आगे के आने वाले 50 सालो बाद क्या होगा ?





Friday, August 28, 2015

सफल रहा GSLV-D6 की मदद से उपग्रह GSAT-6 का प्रक्षेपण !


" 27 अगस्त 2015 को शाम  4 बजकर 52 मिनट पर  भारत ने श्रीहरि कोटा  स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक नयी सफलता को हासिल किया है। यह निश्चित रूप से ही भारत के लिए सफलता का दिन है। भारत  ने अपने नये उपग्रह जी सेट 6  का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। अंतरिक्ष वैज्ञानिको ने इसके सफल प्रक्षेपण के  कारण संचार सेवाओ  में  सुधार होनी की आशा व्यक्त की है।  "


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इस नए भारतीय उपग्रह GSAT 6  को GSLV-D6 रॉकेट की मदद से अंतरिक्ष में  प्रक्षेपित  किया गया है। GSLV-D6 की ख़ास  बात  यह है कि  इसके इंजन को  क्रायोजेनिक तकनीक की मदद से बनाया गया है।  इसलिए यह सफल प्रक्षेपण भारत के और भी महत्वपूर्ण है क्यों कि   भारत ने अपने दम पर  क्रायोजनिक इंजन बनाया है। अपनी इस सफलता की वजह से भारत की इसरो (ISRO) अंतरिक्ष संस्था  आज  अमेरिका, रूस, जापान, चीन और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसियों के बाद ऐसी छठी अंतरिक्ष एजेंसी है ,जिसने स्वदेशी क्रायोजेनिक तकनीक  का सफलतापूर्वक प्रयोग  किया है।  

यह  भारत के लिए क्रायोजेनिक तकनीक के प्रयोग का दूसरा अवसर है। इससे पहले 5  जनवरी 2014  को भारत ने क्रायोजेनिक तकनीक से बने इंजन का   इस्तेमाल  GSLV-D5 के प्रक्षेपण में भी किया था। जो की सफल रहा था।  सफलता की यह राह इतनी आसान नही थी पिछले कुछ  वर्षो में भारत   ने इस हेतु  काफी  प्रयास  किये  थे  परन्तु  सफलता नही मिल  पायी  थी जैसे की इस हेतु भारत ने 15 अप्रैल 2010 में  प्रक्षेपण किया था परन्तु वह सफल नही रहा था। 

इस सफल प्रक्षेपण को मिशन के निदेशक ने आर. उमा महेश्वरन जी  ने ‘ओणम का तोहफा’ बतया है।  उन्होने कहा कि  यह भारत में ही विकसित क्रायोजेनिक इंजन  से युक्त  एक भरोसेमंद प्रक्षेपण है , जो की 2-2.5 टन श्रेणी के उपग्रहों का प्रक्षेपण कर सकता है। यहाँआपको बता दे की अक्सर 2  टन  से अधिक भार वाले उपग्रहो के प्रक्षेपण के लिए उन  रॉकेट को सफल माना  जाता है जिनका इंजन आधुनिक क्रायोजेनिक तकनीक से बना होता है। 

क्रायोजेनिक इंजन वाले इस राकेट की मदद से जिस उपग्रह GSAT 6 को प्रक्षेपित किया गया है।  इस उपग्रह से जुड़े  कुछ महत्वपूर्ण तथ्य इस प्रकार हैं -
    
  • GSAT-6 इसरो द्वारा निर्मित 25 वां भू-स्थतिक संचार उपग्रह है। 
  •  GSAT श्रृंखला में यह 12वां उपग्रह है। 
  •  यह उपग्रह एस-बैंड में पांच स्पॉट बीम और सी-बैंड में एक राष्ट्रीय बीम से युक्त  है। 
  • GSAT 6 उपग्रह का लिफ्ट-ऑफ द्रव्यमान 2,117 किलोग्राम है। प्रणोदकों का वजन 1,132 किलोग्राम और उपग्रह का शुष्क द्रव्यमान 985 किलोग्राम है।
  • GSAT-6 उपग्रह का एक अत्याधुनिक पहलू इसका एस-बैंड का खुलने लायक एंटिना है जिसका व्यास छह मीटर  है। इसरो की ओर से तैयार किया गया यह सबसे बड़ा उपग्रह एंटिना है। 
  • GSLV D6 की ओर से भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा में स्थापित किए जाने के बाद GSAT-6 का नियंत्रण इसरो की मास्टर कंट्रोल फेसिलिटी के हाथों में चला गया है।
अंत में भारत की अंतरिक्ष संस्था ISRO  की टीम को  बहुत बहुत बधाई।  हम आशा करते हैं की यह सफलता भारत के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। 


Wednesday, August 26, 2015

Global Hawk विमान जुटायेगा तूफ़ान सम्बंधित सही सही जानकारी



" Misson SHOUT "
"नासा के कुछ वैज्ञानिक ने हाल ही में एक  SHOUT नामक मिशन पर कार्य  कर रहे हैं। इस मिशन का उदेश्य विमान की मदद से समुद्री क्षेत्रो पर नजर बनाये रखना है, जिससे मौसम से सम्बधित जानकारियो का सही सही अनुमान लगाया जा सके।  इस मिशन का मकसद  विमान की मदद से  तूफ़ान, सुनामी आदि  के मार्ग का पता लगाकर उनसे सम्बंधित भविष्यवाणियों में सुधार लाना है। इस मिशन के तहत समुंद्री क्षेत्रो पर नजर रखने के लिए नासा  आधुनिक उपकरणों से परिपूर्ण "ग्लोबल हॉक " नाम का विमान का इस्तेमाल  करेगा। जो इस सप्ताह  से अपनी उड़ाने शुरू करेगा।"
NOAA यानी की "National Oceans Atmospheric Administrations" ने हाल ही में नासा के साथ मिलकर   "Sensing Hazards with Operational Unmanned Technology" (SHOUT) मिशन पर काम करने  की  प्लानिंग  की है।  यदि  हम इस प्रोजेक्ट की बात करे तो यह प्रोजेक्ट नासा द्वारा तुफानो पर किये जा चुके  शोध कार्यो पर आधारित है।  जिसमे "ग्लोबल हॉक" विमान का उपयोग किया जाएगा। 





Image : Global Hawk Aircraft


समुंदरी क्षेत्रो के वातावरण , मौसम आदि से सम्बंधित जानकारियो को सेन्स करने के लिए इस विमान में जो प्रमुख उपकरण प्रयोग किये गए हैं वह इस प्रकार है। 

1) NOAA: AVAPS ( Advanced Vertical Atmospheric Profiling System ) यह उपकरण इन क्षेत्रो में  तापमान , दवाब , आद्रता एवं हवा की दिशा आदि के बारे में जानकरी देगा। 

2) NASA: HIWRAP (High-Altitude Imaging Wind and Rain Airborne Profiler ) यह एक प्रकार की राडार है, जो की तूफ़ान की तीव्रता से सम्बंधित कारको के बारे में जानकरी देगा जैसे इन तुफानो का बनंना एवं  इनकी संरचना आदि। 

3) NASA JPL: HAMSR ( High Altitude MMIC Sounding Radiometer)  यह माइक्रोवेव स्पेक्ट्रम एरिया में विमान के घूमने में मदद करेगा एवं इस क्षेत्र में   तापमान एवं आद्रता के बारे में जानकरी देगा। 

4) NASA GHRCLIP — CAMEX-4 ER-2 ( Lightning Instrument Package ) इस उपकरण में आठ डिजिटल   फील्ड  लगे   हैं। जिनकी  मदद से इलेक्ट्रिकल  फील्ड  के वेक्टर कम्पोनेंट  का पता लगाकर इलेक्ट्रिकल स्ट्रक्चर से सम्बंधित जानकरी में सुधार करना है। 


इस मिशन में मुख्या  भूमिका निभाने  वाले व्यक्ति इस प्रकार  हैं -

Principal Investigator: Robbie Hood, NOAA UAS Program Director 

Project Managers : Philip Kenul, TriVector Services •JC Coffey, Cherokee Nation Technologies 

Project Scientists : Michael Black, NOAA OAR AOML • Gary Wick, NOAA OAR ESRL • John Walker, Cherokee Nation Technologies 

NOAA द्वारा  नासा के साथ मिलकर शुरू किया गया यह मिशन प्राकृतिक आपदाओ जैसे तूफ़ान , बाढ़ ख़राब मौसम आदि के बारे में सही जानकारी देकर निश्च्य ही इन आपदाओ से होने वाले नुक्सान को कम   सहायक  साबित होगा। 

Reference: http://www.nasa.gov/centers/armstrong/features/shout_mission_begins.html

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