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Sunday, September 17, 2017

बचपन कुछ कहता है !

धुँधली यादो के झरोखे से , बचपन मुझसे कहता है !
जब मैं था कितना खुश था तू , अब क्यों चुप चुप सा रहता है !!

हाथ पकड़ संग पिता के चलना ,मन में विश्वाश जगाता था !
जीवन पथ पर कैसे है चलना ? यह हमको सिखलाता था !!

क्या भूल गया तू वो सभी बातें,जो बचपन में सिखलाई थी !
जिनको अपनाने से जीवन में खुशियां आयी थी !!

चल फिर से अपना ले मुझको, अब देरी क्यों सहता है !

धुँधली यादो के झरोखे से , बचपन मुझसे कहता है !
जब मैं था कितना खुश था तू , अब क्यों चुप चुप सा रहता है !!

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